राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख अजित पवार की ओर से पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगम (पीसीएमसी) में लगाए जा रहे भ्रष्टाचार के आरोपों पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उप मुख्यमंत्री ने 'मैत्रीपूर्ण मुकाबला' करने की प्रतिबद्धता का पालन नहीं किया।
फडणवीस पुणे में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। फडणवीस ने महायुति के घटक दलों के बीच एक समझौते का जिक्र किया, जिसमें एक शर्त यह थी कि एक-दूसरे पर व्यक्तिगत हमले नहीं करेंगे। अजित पवार राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा हैं। इसके बावजूद उन्होंने पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ स्थानीय निकाय चुनाव में अपने चाचा शरद पवार की पार्टी के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ने का फैसला किया।
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अजित पवार ने पीसीएमसी पर क्या आरोप लगाए?
अजित पवार, पुणे जिले के संरक्षक मंत्री भी हैं। उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि स्थानीय लोग टैंकर माफियाओं के कारण समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पीसीएमसी के विभिन्न विभागों में करीब चार हजार करोड़ रुपये के बिल लंबित हैं और कई जगह लागत बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई गई है। उदाहरण के तौर पर 70 लाख रुपये की सड़क को सात करोड़ रुपये में बनाया गया और निगम के लिए सॉफ्टवेयर की लागत 12 करोड़ से बढ़ाकर 120 करोड़ रुपये कर दी गई।
पहले, अजित पवार ने कहा, चुनाव शुरू होने के बाद मैंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि क्या-क्या गलत हुआ। पिंपरी-चिंचवाड़ इतना समृद्ध निगम होने के बावजूद उन्हें बांड लेने पड़े। विभिन्न विभागों में करीब चार हजार करोड़ रुपये के बिल लंबित हैं और भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। मैंने उदाहरण दिए। 70 लाख रुपये के पुल की लागत बढ़ाकर सात करोड़ कर दी गई। 12 करोड़ का सॉफ्टवेयर 120 करोड़ रुपये तक पहुंचा दिया गया।
फडणवीस ने अजित पवार के आरोपों पर क्या कहा?
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए फडणवीस ने कहा, मैं वह व्यक्ति हूं जो अपनी प्रतिबद्धता पर खड़ा रहता है। इसलिए जब तय हुआ कि पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ में हम एनसीपी के साथ चुनाव नहीं लड़ेंगे और यह मित्रतापूर्ण मुकाबला होगा, हम यह प्रतिबद्धता पूरी तरह निभाई। लेकिन अजित पवार ने नहीं निभाई। उन्होंने ऐसा क्यों किया, मुझे पता नहीं।
फडणवीस ने कहा, हम हमेशा विपक्ष को भी साथ लेकर चले हैं। अजित पवार केवल पुणे में हमारे विरोधी हैं, अन्य जगह वह हमारे साथ हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में एनसीपी के दो गुटों के मिलन को लेकर कोई ठोस विकास नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा, अभी इस मुद्दे पर आगे टिप्पणी करना उचित नहीं है, क्योंकि अभी तक कुछ ठोस नहीं हुआ है। कोई चर्चा या विलय नहीं हुआ है। पुणे नगर निगम चुनाव में वह साथ लड़ रहे हैं, लेकिन बाकी 27 नगर निगमों में अलग-अलग लड़ रहे हैं। इसलिए इस पर ज्यादा बोलना ठीक नहीं है।
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उन्होंने ठाकरे भाइयों पर भी हमला किया और उद्धव ठाकरे पर मराठी भाषा को खतरे में डालने का आरोप लगाया। उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख के वोट चोरी के आरोपों को खारिज किया। फडणवीस ने कहा कि उन्होंने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के चुने हुए निगम पार्षदों को अपनी पार्टी में शामिल किया।
उद्धव ठाकरे के वोट चोरी के आरोप पर सीएम ने क्या कहा?
फडणवीस ने आगे कहा, मैं राज ठाकरे से केवल एक बात कहना चाहता हूं। कल मैंने साक्ष्य पेश किया कि उद्धव ठाकरे ने राज्य में हिंदी अनिवार्य करने का निर्णय लिया। अब जब आपके भाई के साथ आपकी समझदारी बन रही है, तो मुझ पर टिप्पणी करने की बजाय उनसे पूछें कि वास्तविकता क्या है। उन्होंने मराठी भाषा को खतरे में डाला, फिर भी आप उनके साथ गठबंधन कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, "उद्धव ठाकरे को वोट चोरी की बात नहीं करनी चाहिए। वह सीधे पार्षदों की चोरी करते हैं। बीएमसी में उन्होंने आठ पार्षदों को मनसे से अपनी पार्टी में शामिल किया। हम वोट नहीं चुराते, लेकिन जो ज्यादा गंभीर है, वह है चुने गए प्रतिनिधियों की चोरी और यही वह करते हैं।
नगर निगम चुनावों को लेकर फडणवीस ने कहा, सभी शहरों में पूरी तरह सकारात्मक माहौल है, चाहे वह पुणे हो, मुंबई, नागपुर, नासिक या कहीं और। लोगों का मन पहले ही तय हो चुका है। कोई भी कुछ भी कहे, यह सोच नहीं बदलेगी। जनता का मूड यही दिखाता है कि भाजपा और महायुति इस चुनाव में जीतेंगे।