महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी अध्यक्ष अजित पवार ने पत्नी सुनेत्रा पवार को बहन सुप्रिया सुले के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़वाने पर एक बार फिर अपनी गलती मानी है। उन्होंने कहा कि यह उनकी भूल थी।
मेरी गलती थी...
अजित पवार ने आज बारामती से नामांकन दाखिल किया। इसके बाद पत्रकारों से बात की। इस दौरान उन्होंने कहा, 'मैंने अपनी बहन सुले के खिलाफ पत्नी सुनेत्रा को उतारकर गलती की। यह मेरी भूल थी। मैं मानता हूं।'
उन्होंने आगे कहा, 'हर किसी को चुनाव लड़ने का अधिकार है। जब भी मेरे खिलाफ कोई उम्मीदवार उतारा जाता है तो मैं उन्हें एक मजबूत उम्मीदवार के रूप में लेता हूं और उसके अनुसार प्रचार करता हूं। इस बार भी बारामती के लोग मुझे चुनेंगे और मुझे उन पर भरोसा है।'
राजनीति को घर में घुसने नहीं देना चाहिए: अजित पवार
गौरतलब है, एनसीपी अध्यक्ष पहले भी इस बात को स्वीकार कर चुके हैं कि राजनीति को घर में घुसने नहीं देना चाहिए। उनका अपनी पत्नी को बहन के खिलाफ चुनाव लड़ाने का फैसला गलत था।
यह है सियासी विवाद
गौरतलब है, इस साल की शुरुआत में हुए लोकसभा चुनावों में सुनेत्रा पवार ने एनसीपीएसपी सांसद सुप्रिया सुले के खिलाफ बारामती सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। सुनेत्रा पवार बाद में राज्यसभा के लिए चुनी गईं। पिछले साल जुलाई में, अजित पवार और कई अन्य विधायक शिवसेना-भाजपा सरकार में शामिल हो गए थे। इससे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में विभाजन हो गया। चुनाव आयोग ने बाद में अजित के नेतृत्व वाले समूह को असली एनसीपी करार दिया।
मैं अपनी सभी बहनों से प्यार करता हूं: अजित
अब अजित पवार ने कहा था, 'मैं अपनी सभी बहनों से प्यार करता हूं। राजनीति को घरों में घुसने नहीं देना चाहिए। मैंने अपनी बहन के खिलाफ सुनेत्रा को उतारकर गलती की। ऐसा नहीं होना चाहिए था। लेकिन संसदीय बोर्ड (एनसीपी) ने एक निर्णय किया। अब मुझे लगता है कि यह गलत था।'
शरद पवार परिवार के मुखिया
उपमुख्यमंत्री ने कहा था कि उन्होंने केवल किसानों, महिलाओं और युवाओं के लिए विकास और कल्याण योजनाओं पर बोलने का फैसला किया है और खुद की आलोचना का जवाब नहीं देंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि शरद पवार एक वरिष्ठ नेता और उनके परिवार के मुखिया हैं और वह बाद में की गई किसी भी आलोचना का जवाब नहीं देंगे।
सत्तारूढ़ भाजपा और शिवसेना द्वारा शरद पवार को निशाना बनाए जाने के बारे में एनसीपी नेता ने कहा था कि महायुति के सहयोगी दलों को भी समझना चाहिए कि वे क्या बोलते हैं। उन्होंने कहा था, 'जब हम साथ बैठते हैं तो मैं अपनी राय देता हूं।