इस्लामिया कॉलेज के मैदान में 16 अक्तूबर को अपने स्थापना दिवस पर आईएमसी राजनीतिक ताकत दिखाने के साथ-साथ रालोद सहित कई छोटे दलों से गठजोड़ के संकेत दे सकती है। यह रैली सांप्रदायिक सद्भावना के नाम पर हो रही है। इसमें रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह के शामिल होने से यह संकेत मिल रहे हैं कि वह पश्चिमी यूपी में जाट और मुस्लिम वोटों को जोड़ने की तैयारी है। बताया जा रहा कि रैली में कई और दलों के नेता भी शामिल हो सकते हैं जो कि भविष्य में गठजोड़ का हिस्सा बन सकते हैं।
रालोद और आईएमसी का फोकस पश्चिमी यूपी में मुस्लिम और जाट वोटरों के समीकरण पर है। सात साल पहले भी गठजोड़ हुआ था लेकिन चुनाव बाद गठजोड़ आगे नहीं बढ़ सका। इस बार फिर से बरेली के अलावा मुरादाबाद, अलीगढ़, आगरा, मेरठ मंडलों सहित 30 जिलों को ध्यान में रखकर गठजोड़ के प्रयास किए जा रहे हैं। इस रैली में कई गैर राजनीतिक लोगों को भी बुलाया गया है। फिलहाल रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह का आना तय हो गया है। अन्य नेताओं के आने के बारे में अभी असमंजस है।
मौलाना तौकीर रजा ने बरेली में सद्भावना रैली के लिए आमंत्रित किया है। प्रदेश में जिस तरह का माहौल है उस दृष्टि से सद्भावना के लिए काम किया जाना जरूरी है। मैंने इस रैली में शामिल होने का फैसला लिया है। भविष्य में चुनावी गठजोड़ की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता।
चौधरी अजित सिंह, रालोद मुखिया
आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा का कहना है, 'रैली सद्भावना को लेकर है। चूंकि हम राजनीतिक हैं, इसलिए भविष्य में हालात ठीक रहे तो चुनावी गठजोड़ हो सकता है। गठजोड़ एक नहीं अन्य सेक्युलर दलों से भी संभव है।'