भाजपा नेता का कहना था कि न्यायालय ने 12 मार्च को टिप्पणी की थी कि कुछ अदृश्य व्यक्ति इन मामलों की जांच में बाधा डाल रहे हैं और उसने सीबीआई तथा प्रवर्तन निदेशालय को अपनी जांच छह महीने में पूरी करने का निर्देश दिया था। सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर एस सूरी ने पीठ से कहा कि प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी ने इस मामले में अवमानना याचिका भी दायर की है और न्यायालय को इस पर भी सुनवाई करनी चाहिए।
शीर्ष अदालत ने 12 मार्च को जांच एजेन्सियों को इन मामलों में छह महीने के भीतर अपनी जांच पूरी करने का आदेश दिया था और इसमें एक आरोप पत्र दाखिल हो चुका है जबकि निदेशालय एक अन्य आरोप पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया में है। दूसरी ओर, सिंह ने दावा किया है कि इसी तरह का मुद्दा करीब सात साल पहले टूजी मामले की सुनवाई करने वाली न्यायमूर्ति जी एस सिंघवी की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष भी उठाया गया था। लेकिन केन्द्रीय सतर्कता आयोग और सीबीआई ने उस समय सिंह को क्लीन चिट दे दी थी अब एक बार फिर वही आरोप लगाये गये हैं।
यह मामला बतौर वित्त मंत्री चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान एयरसेल-मैक्सिस सौदे में विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड द्वारा मंजूरी देने में कथित अनियमितताओं से संबंधित है। इस मामले में जांच एजेंसियों ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और उनके पुत्र कार्ति से भी पूछताछ की थी।