इससे पहले पी. चिदंबरम के बेटे और उनसे जुड़ी बताई जा रही एक फर्म एडवांटेज स्ट्रेटेजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड की परेशानियां बढ़ गई हैं। उनके खिलाफ एयरसेल-मेक्सिस मनी लांड्रिंग केस में गैरकानूनी आय के पर्याप्त सबूत होने की बात धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) प्राधिकरण ने मान ली थी।
अर्द्धन्यायिक प्राधिकरण ने ये बात अपनी लिखित टिप्पणी में शामिल करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कार्ति चिदंबरम और फर्म के नाम की 1.16 करोड़ रुपये की संपत्ति को सीज करने के आदेश को भी हरी झंडी दिखा चुकी है।
पीएमएलए के तहत निर्णायक प्राधिकरण के एक शीर्ष अधिकारी ने अपने 171 पेज के आदेश में कहा, कार्ति इस संपत्ति को मनी लांड्रिंग के अपराध के तहत हुई आय नहीं होना साबित नहीं कर पाए हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी ने पिछले साल सितंबर में कार्ति और फर्म से जुड़े फिक्स्ड डिपॉजिट और बैंक बैलेंस को अटैच कर लिया था और अब प्राधिकरण ने इसे सही बताया है।
प्राधिकरण ने अपने निर्णय में कहा है, अस्थायी तौर पर अटैच की गई संपत्ति का संबंध मनी लांड्रिंग में होना पाया गया है। इस निर्णय के बाद अब ईडी चेन्नई स्थित एक बैंक की शाखा में मौजूद करीब 1 करोड, 16 लाख, 9 हजार तीन सौ अस्सी रुपये के इन फिक्स्ड डिपॉजिट और बैंक बैलेंस के अपने अधिकार में लेने की तैयारी में है।
बता दें कि पिछले साल एक विशेष अदालत ने इस मामले में अन्य आरोपियों को आरोपों से राहत दे दी थी, लेकिन एजेंसी की जांच को जारी रखा गया था। ईडी ने ये भी आरोप लगाया है कि कार्ति ने पीएमएलए के तहत आ रही गुरुग्राम की कुछ संपत्ति को बेच दिया और कुछ बैंक खाते बंद कर दिए हैं।
ईडी ने सीबीआई की तरफ से टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले के तहत चल रही जांच के दौरान दर्ज की गई एक एफआईआर का संज्ञान लेकर एयरसेल-मेक्सिस सौदे से जुड़े मामले की जांच शुरू की थी। इस सौदे को हरी झंडी दिखाने के मामले में वित्त मंत्रालय से जुड़ा फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशनल बोर्ड (एफआईपीबी) भी जांच के दायरे में है।
प्राधिकरण ने जांच कर रहे ईडी के संयुक्त निदेशक राजेश्वर सिंह में भी अपना पूरा विश्वास जताया। साथ ही बचाव पक्ष के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि यदि ये संपत्ति अटैच नहीं की जाती तो अपराध के छुपाए जाने की संभावना का आरोप मात्र जांच अधिकारी का अपना विश्वास है।
प्राधिकरण ने कहा, इस मामले में सामने आए सबूतों के आधार पर पुख्ता रिपोर्ट दी गई है और ये किसी भी तरह से मात्र संभावना के आधार पर की गई कार्रवाई नहीं है। कार्ति को हालांकि प्राधिकरण के निर्णय के खिलाफ 45 दिन के अंदर अपील करने की छूट दी गई है।