अदालत ने एयरसेल-मैक्सिस मनी लांड्रिंग मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की गिरफ्तारी पर रोक 10 जुलाई तक बढ़ा दी है। पटियाला हाउस कोर्ट के विशेष सीबीआई जज ओपी सैनी के समक्ष प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से पेश अधिवक्ता सोनिया माथुर और नितेश राणा ने चिदंबरम की याचिका पर जवाब देने को चार सप्ताह मांगे। इसके बाद कोर्ट ने चिदंबरम की गिरफ्तारी पर रोक की अवधि बढ़ा दी।
30 मई को भी कोर्ट ने ईडी को पी. चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका पर 5 जून तक जवाब देने का निर्देश दिया था। चिदंबरम के वकील अभिषेक मनु सिंघवी और प्रमोद दुबे ने कहा कि मामले की सुनवाई के लिए 10 जुलाई की तारीख तय कर दी जाए। उसी दिन कार्ति चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका पर भी सुनवाई होगी।
चिदंबरम ने कोर्ट से कहा कि मामले में ज्यादातर साक्ष्य दस्तावेजी हैं। सभी दस्तावेज पहले से ही सरकार और एजेंसी के पास हैं। इसलिये गिरफ्तार कर हिरासत में पूछताछ का कोई औचित्य नहीं है। वह एजेंसी के साथ सहयोग को तैयार हैं। अदालत ने उनका तर्क स्वीकार करते हुए चिदंबरम की गिरफ्तारी पर रोक के अंतरिम आदेश को 10 जुलाई तक बढ़ा दिया।
ईडी का दावा, चिदंबरम ने अधिकार से बाहर जाकर दी थी मंजूरी
एयरसेल-मैक्सिस सौदे को तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने 2006 में मंजूरी दी थी। ईडी का कहना है कि चिदंबरम को 600 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं को मंजूरी देने का अधिकार था। इससे ज्यादा के लिए आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति की मंजूरी की जरूरत थी। यह मामला 3,500 करोड़ रुपये के एफडीआई की मंजूरी का था। इसके बावजूद एयरसेल-मैक्सिस एफडीआई मामले में चिदंबरम ने मंजूरी दी। मामले में सीबीआई 2011 और ईडी 2012 से जांच कर रही है।