एयरसेल मैक्सिस केस में पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका का विरोध करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया है। मामले की सुनवाई गुरुवार को होगी। ED ने कहा है कि हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की जरूरत है। जमानत दिए जाने से जांच को नुकसान होगा।
बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एयरसेल-मैक्सिस धन शोधन मामले में बृहस्पतिवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। ईडी ने चिदंबरम पर विदेशी निवेशकों के उद्यमों को मंजूरी देने के लिए उनके साथ सांठगांठ करने का आरोप लगाया था।
विशेष न्यायाधीश ओ पी सैनी ने आरोपपत्र पर विचार करने के लिए 26 नवंबर की तारीख तय की। ईडी ने मामले में पहला आरोपपत्र चिदंबरम के पुत्र कार्ती के खिलाफ दायर किया था। बाद में उनके खिलाफ एक पूरक आरोपपत्र भी दायर किया गया था।
एजेंसी ने इस मामले में नौ आरोपियों के नाम शामिल किये हैं जिनमें चिदंबरम, एस भास्कररमन (कार्ती के सीए), वी श्रीनिवासन (एयरसेल के पूर्व सीईओ) भी हैं। उनके खिलाफ आरोप है कि मार्च 2006 में पूर्व मंत्री द्वारा विदेशी निवेशक ग्लोबल कम्युनिकेशन एंड सर्विसेज होल्डिंग्स लिमिटेड, मॉरीशस को अवैध एफआईएफबी अनुमोदन दिए जाने के बदले 1.16 करोड़ रुपये का धनशोधन किया गया। आरोप है कि यह मंजूरी भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति से जुड़े विभिन्न नियमों का उल्लंघन कर दी गयी।
ईडी ने दूसरा पूरक आरोपपत्र दायर करते हुए कहा कि 2006 में भारत सरकार की एफडीआई नीति के नियमों के तहत तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम को 600 करोड़ रूपए तक के विदेशी निवेश के प्रस्ताव को मंजूरी देने का अधिकार था। ग्लोबल कम्युनिकेशन एंड सर्विसेज होल्डिंग्स लिमिटेड का निवेश प्रस्ताव आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) को भेजा जाना था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया और ‘साजिश’ के तहत चिदंबरम द्वारा मंजूरी दे दी गयी।
इसमें कहा गया है कि आरोपपत्र पर्याप्त भौतिक सबूतों पर आधारित है जो ईमेल के रूप में हैं तथा कार्ती और उसके सहयोगियों के जब्त डिजिटल उपकरणों से प्राप्त किए गए हैं। इस मामले में पहला आरोपपत्र 13 जून को कार्ती के खिलाफ दायर किया गया था जिसमें दावा किया गया था कि एयरसेल-मैक्सिस धनशोधन मामले में रिश्वत के रूप में दो कंपनियों को कथित तौर पर 1.16 करोड़ रूपये मिले थे। आरोपपत्र के अनुसार इन कंपनियों पर कार्ती का नियंत्रण था। ईडी की ओर से वकील एन के मट्टा और नीतेश राणा अदालत में उपस्थित हुए।