भारतीय वायुसेना के पूर्व ग्रुप कैप्टन डीके पारुलकर (सेवानिवृत्त), जिन्होंने 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान पाकिस्तान के रावलपिंडी में बंदी शिविर से फरार होने के तीन सैन्य कर्मियों का नेतृत्व किया था, उनका निधन हो गया है। भारतीय वायुसेना ने रविवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, उनका निधन महाराष्ट्र के पुणे के पास हुआ।
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वायुसेना ने वायु वीर को किया नमन
भारतीय वायुसेना ने एक्स पर लिखा- 'ग्रुप कैप्टन डी.के. पारुलकर (से.नि.) वीएम, वीएसएम- 1971 युद्ध के नायक, जिन्होंने पाकिस्तान की कैद से साहसिक भागने का नेतृत्व किया और भारतीय वायुसेना के अद्वितीय साहस, चतुराई और गौरव को प्रदर्शित किया- अब हमारे बीच नहीं रहे। पूरी वायुसेना परिवार की ओर से गहरी संवेदनाएं।'
1965 के भारत-पाक युद्ध में साहसिक प्रदर्शन
इस पोस्ट में उनके वीरता पुरस्कार प्रशस्ति पत्र का एक पुराना अंश भी साझा किया गया। इसके मुताबिक, मार्च 1963 में वायुसेना में कमीशन प्राप्त करने वाले पारुलकर ने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया, जिनमें एयर फोर्स अकादमी में फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर भी शामिल है। 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान, उनके विमान को दुश्मन की गोलीबारी से नुकसान हुआ और उनके दाहिने कंधे में चोट लगी। अपने कमांडर की सलाह के बावजूद कि वे विमान से बाहर निकल जाएं, उन्होंने क्षतिग्रस्त विमान को सुरक्षित बेस तक उड़ाकर लाया, जिसके लिए उन्हें वायु सेना पदक से सम्मानित किया गया।
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दो साथियों के साथ पाकिस्तान की कैद से भागे
1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान, विंग कमांडर डीके पारुलकर ने पाकिस्तान में युद्धबंदी रहते हुए भी असाधारण साहस और अपने राष्ट्र और भारतीय वायु सेना के प्रति गौरव का परिचय दिया। वे एक भागने के प्रयास के अगुआ थे जिसमें वे अपने दो सहयोगियों के साथ युद्धबंदी शिविर से भाग निकले। एक शत्रुतापूर्ण, विश्वासघाती और अप्रत्याशित शत्रु के सामने किए गए इस प्रयास के लिए अथक परिश्रम, दृढ़ संकल्प और वीरता की आवश्यकता थी, जो भारतीय वायु सेना की सर्वोच्च परंपरा में था। इस कार्य ने शत्रु को न केवल हवा में, बल्कि जमीन पर भी, भारतीय वायु सेना और हमारे महान राष्ट्र की क्षमता का सम्मान करने के लिए मजबूर कर दिया।