पश्चिम एशिया में जारी तनाव और हवाई सेवाओं पर लगी पाबंदियों का असर अब एविएशन सेक्टर पर साफ दिखने लगा है। इसी के चलते भारतीय एयरलाइंस ने मई माह में अपनी साप्ताहिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में करीब 25 फीसदी तक की कटौती की है। युद्ध की स्थिति, हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध और पाकिस्तान के एयरस्पेस में रोक के कारण उन्हें यह फैसला लिया गया है। कंपनियों का तर्क है कि इन हालात में उड़ानों की लागत बढ़ गई है। कई रूट्स पर विमानों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है, जिससे संचालन और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है।
विमानन क्षेत्र का विश्लेषण करने वाली फर्म सिरियम के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय एयरलाइंस ने इस साल मई में पिछले वर्ष के मुकाबले अपनी साप्ताहिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में 1,034 की कमी की है। यह कटौती लगभग 24.59 प्रतिशत है। जबकि विदेशी विमानन कंपनियां के साप्ताहिक परिचालन में केवल 1.2 प्रतिशत की मामूली गिरावट आई है। इससे साफ होता है कि बाजार में उनकी स्थिति स्थिर है।
दरअसल,फरवरी में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बाद कई इलाकों में हवाई क्षेत्र बंद कर दिया था। इससे भारतीय एयरलाइंस की मुश्किलें बढ़ गई है। वहीं ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद कर दिया गया था। इन हवाई रूट बंद होने से एयरलाइंस को छोटे रूट की बजाय लंबा और घुमावदार रास्ता अपनाना पड़ रहा है, जिससे उड़ान समय और ईंधन खर्च दोनों बढ़ रहे हैं। इसका असर लागत पर पड़ रहा है। जहां सामान्य दिनों में एटीएफ का खर्च कुल लागत का करीब 40 प्रतिशत होता है। जबकि यह बढ़कर 50-60 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इससे कंपनियों पर दबाव और बढ़ गया है।
भारतीय एयरलाइंस में उड़ानों में कटौती के मामले में एयर इंडिया समूह सबसे आगे है। एयर इंडिया एक्सप्रेस की साप्ताहिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानें 959 से घटकर 451 रह गई हैं। वहीं एयर इंडिया ने भी 288 उड़ानें कम कर अपनी साप्ताहिक संख्या 881 कर दी है। स्पाइसजेट ने भी अंतरराष्ट्रीय परिचालन में 60 प्रतिशत से ज्यादा कटौती की है। अब वह 176 के मुकाबले सिर्फ 70 साप्ताहिक उड़ानें चला रही है। इंडिगो ने भी 150 उड़ानें घटाकर अपनी साप्ताहिक संख्या 1,687 कर दी है।