समयसीमा क्यों जरूरी है?
इस मामले में अदालत की सहायता कर रहीं एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने कहा कि ऐसे ही सुझाव पहले भी कई योजनाओं में दिए जा चुके हैं, लेकिन वे कागजों से आगे नहीं बढ़े। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि हर सिफारिश के लिए स्पष्ट समयसीमा तय की जाए, ताकि जिम्मेदारी तय हो सके और अमल सुनिश्चित किया जा सके।
पहले भी फटकार, फिर भी सुधार क्यों नहीं?
गौरतलब है कि इससे पहले छह जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने सीएक्यूएम को कड़ी फटकार लगाई थी। अदालत ने कहा था कि दिल्ली की हवा हर साल खराब होना एक वार्षिक संकट बन गया है, लेकिन जिम्मेदार संस्थाएं गंभीरता नहीं दिखा रहीं। दिसंबर की सुनवाई में भी कोर्ट ने व्यावहारिक और स्थायी समाधान की जरूरत बताई थी। अदालत ने बीएस-4 मानक पूरे न करने वाले पुराने वाहनों पर कार्रवाई की अनुमति भी दी थी।
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