Deputy Chief of Air Staff Air Marshal Raghunath Nambiar
भारतीय वायुसेना के उपप्रमुख एयर मार्शल रघुनाथ नांबियार ने बृहस्पतिवार को भारत के लिए बनाए गए पहले राफेल लड़ाकू विमान को उड़ाया। वह 80 मिनट तक हवा में रहे। उन्होंने जो 17 साल पुराना राफेल विमान उड़ाया, वह भारतीय जरूरतों के मुताबिक लगाए गए सॉफ्टवेयर और सिस्टम से लैस है।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, चार दिन पहले पेरिस पहुंचे नांबियार ने इसकी क्षमता का आकलन करने के लिए फ्रांस में यह विमान उड़ाया। डसॉल्ट एविएशन द्वारा राफेल विमान बनाए जाने की प्रगति का आकलन करने वह फ्रांस गए हैं। इन विमानों को भारत को सौंपने का काम अगले साल सितंबर से शुरू होगा।
भारत के लिहाज से विमान तैयार करने और उसमें हथियार प्रणाली शामिल करने में डसॉल्ट एविएशन की मदद करने के लिए भारतीय वायु सेना की एक टीम पहले से ही फ्रांस में मौजूद है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, राफेल विमानों के आने के बाद भारतीय वायुसेना में क्रांति आएगी।
राफेल विमानों की सरकारी खरीद से जुड़े समझौते पर जारी विवाद के बीच यह खबर आई है। विपक्ष मोदी सरकार पर राफेल डील में घोटाले का आरोप लगा रहा है। वहीं, सरकार इसमें पारदर्शिता की बात कह रही है। वायुसेना भी राफेल विमान के पक्ष में है।
2016 में भारत और फ्रांस सरकार के बीच 36 राफेल विमान खरीदने के लिए 59 हजार करोड़ रुपये का सौदा हुआ है। कांग्रेस का आरोप है कि यूपीए सरकार में 526 करोड़ रुपये में एक राफेल विमान खरीदने का सौदा हुआ था, जिसे मोदी सरकार 1670 करोड़ रुपये में खरीद रही है।