भारतीय वायुसेना की पश्चिमी कमान की जिम्मेदारी संभालने वाले एयर मार्शल चंद्रशेखरन हरि कुमार का कहना है कि मुझे लगता है कि यह नियति थी। उन्होंने यह बात वायुसेना द्वारा 26 फरवरी को जैश-ए-मोहम्मद के बालाकोट स्थित आतंकी ठिकानों पर किए गए हवाई हमलों के बारे में कहीं। इस अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम देने के दो दिन बाद यानी 28 फरवरी को वह सेनानिवृत्त हो गए हैं।
सोशल मीडिया पर हरि कुमार के खिलाफ एक अभियान चल रहा था, जो पूरी तरह पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित था। इसमें कहा गया था वायुसेना ने उन्हें बर्खास्त कर दिया है। जबकि हरि कुमार 39 सालों से अधिक समय तक अपनी सेवा देने के बाद सेनानिवृत हुए हैं। उनकी जगह अब एयर मार्शल रघुनाथ नांबियार ने कमान संभाली है।
अपनी सेवा के आखिरी दिनों में हरि कुमार ने वह काम किया जिसके लिए उन्हें वायुसेना में पिछले 40 सालों तक प्रशिक्षण मिला था। उन्होंने दुश्मन को मारने के लिए हवाई शक्ति का इस्तेमाल किया। वह 1999 में हुए कारगिल युद्ध के दौारन हुए ऑपरेशन का भी हिस्सा थे लेकिन तब उन्होंने एयर स्ट्राइक (हवाई हमलों) में भाग नहीं लिया था।
पूर्व एयर मार्शल ने कहा, 'यह मेरे लिए अवसर था और हमारे पास क्षमता थी। मैं घर जाने के लिए पूरी तरह से तैयार था जब वायुसेना से मुझे आदेश मिला और मैं तुरंत ऑपरेशनल मोड में वापस आ गया। हम हमेशा तैयार रहते हैं।' 26 फरवरी को हुई एयर स्ट्राइक की उन्होंने निगरानी की थी और अगले दिन पाकिस्तान वायु सेना द्वारा किए गए जवाबी हमले में भारत की प्रतिक्रिया को समन्वित किया था।
हरि कुमार ने अपने चार दशक के करियर में मिग-21 लड़ाकू स्क्वॉड्रन का नेतृत्व किया है। विंग कमांडर अभिनंदन भी मिग-21 में सवार थे। 27 फरवरी को पाकिस्तान के लड़ाकू विमान को मारते हुए वह गलती से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में पहुंच गए थे। जहां से पाकिस्तानी सेना ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। भारत की यह एयर स्ट्राइक पुलवामा आतंकी हमले का आतंकियों को दिया गया जवाब था।