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एयर इंडिया यूनियन की सरकार से गुहार, निजीकरण से पहले मेडिकल और प्रोविडेंट फंड जैसे मुद्दों का करें निपटान

Tue, 29 Dec 2020 02:40 PM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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एयर इंडिया - फोटो : PTI
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केंद्र सरकार एयर इंडिया का निजीकरण करने जा रही है। कर्मचारियों के बीच अपने स्वास्थ्य फंड, प्रोविडेंट फंड और वेलफेयर सुविधाओं को लेकर चिंता है। इसी के मद्देनजर 'एयर इंडिया इंप्लाइज यूनियन (एआईईयू)' ने नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर कर्मचारियों के स्वास्थ्य फंड, प्रोविडेंट फंड और वेलफेयर सुविधाओं सहित विभिन्न लंबित मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तत्काल अपॉइंटमेंट की मांग की है। 

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26 दिसंबर को लिखे गए अपने पत्र में एआईईयू ने मंत्री हरदीप सिंह पुरी से मांग की है कि वे चिकित्सा योजना को जारी रखें, क्योंकि इसका लाभ कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को मिल रहा है। इसके अलावा, उन्होंने एयर इंडिया के निजीकरण के बाद भी अपने प्रोविडेंट फंड ट्रस्टों को जारी रखने की अपील की। 


पत्र में कहा गया, एआईईयू रिकॉर्ड पर रखना चाहता है कि सेवानिवृत्ति के समय लीव इनकैशमेंट (छुट्टी के बदले पैसे) प्राप्त कर लाभ उठाने की प्रथा है। कई कर्मचारी एक अच्छे सेवानिवृत्त जीवन जीने के लिए इस लाभ पर निर्भर हैं। कई कर्मचारियों को भारी वित्तीय नुकसान होगा। इसलिए, एआईईयू यह प्रस्ताव करना चाहता है कि कर्मचारियों को 31 मार्च, 2021 तक लीव इनकैशमेंट भत्ते का भुगतान किया जाए।
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यूनियन ने यह भी मांग की कि जनवरी 2002 से लंबित उनकी मांगों के चार्टर को विनिवेश से पहले निपटाया जाना चाहिए और सभी कर्मचारियों के बकाया का भुगतान किया जाना चाहिए।

इस साल जनवरी में, सरकार ने एयर इंडिया और इसकी अंतरराष्ट्रीय शाखा एयर इंडिया एक्सप्रेस लिमिटेड में अपनी 100 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए बोलियां लगवाईं। इसके अलावा, ग्राउंड-हैंडलिंग ज्वाइंट वेंचर एयर इंडिया एसएटीएस एयरपोर्ट सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड में 50 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए भी बोली लगाई गई। 
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इस वर्ष 20 जनवरी को जारी प्रारंभिक सूचना ज्ञापन के अनुसार, एयर इंडिया के कुल 14,032 कर्मचारी थे, जिनमें 9,426 स्थायी और बाकी कर्मचारी एक नवंबर, 2019 तक अनुबंध पर थे। एयरलाइन ने 31 मार्च, 2019 तक कुल 60,074 करोड़ रुपये के नुकसान की जानकारी दी थी।  

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