एअर इंडिया विमान हादसे का शिकार बने पीड़ितों के परिवारों ने हवाई जहाज के ब्लैक बॉक्स का डेटा सार्वजनिक करने की मांग की है। विमान हादसे के 10 महीने बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पीड़ित परिवारों ने कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (सीवीआर) और ब्लैक बॉक्स का डेटा सार्वजनिक करने की मांग को लेकर पत्र लिखा।
बीते साल 12 जून, 2025 को सरदार वल्लभभाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरने के तुरंत बाद एअर इंडिया का विमान एआई-171 एक भयावह दुर्घटना का शिकार हो गया था। इस हादसे में 260 लोगों की जान चली गई थी। हादसे में विमान में सवार 242 लोगों में से 241 और जमीन पर मौजूद 19 लोगों की मौत हो गई थी।
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हादसे की सच्चाई जानना चाह रहे पीड़ित परिवार
अहमदाबाद में शनिवार को हुई एक बैठक में गुजरात भर से आए 30 शोक संतप्त परिवारों ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में हादसे के पीछे की सच्चाई का पता लगाने के लिए सीवीआर और ब्लैक बॉक्स का डेटा जारी करने का अनुरोध किया है। परिवारों का कहना है कि वे जानना चाहते हैं कि दुर्घटना की वजह क्या थी और क्या कोई तकनीकी खराबी थी?
सार्वजनिक न करें तो निजी तौर पर साझा करें डेटा
यह पत्र विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी), नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को भी भेजा गया है। पत्र में कहा गया है कि अगर ब्लैक बॉक्स का डेटा सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है, तो कम से कम इसे पीड़ितों के परिवारों के साथ निजी तौर पर साझा किया जाए।
'मेरा घर अब खाली लगता है'
हादसे में अपने 24 वर्षीय बेटे को खोने वाले निलेश पुरोहित ने कहा, "मेरा घर अब खाली लगता है। कोई भी मुआवजा इस खालीपन को नहीं भर सकता। हमें पैसा नहीं चाहिए, हम बस यह जानना चाहते हैं कि क्या हुआ था।"
कमियों को भी किया उजागर
विमान हादसे में अपनी मां को खोने वाली गुजरात के वासद की रहने वाली किंजल पटेल एअर इंडिया द्वारा हाल ही में पीड़ितों के सामान को वापस दिलाने में मदद के लिए बनाई गई वेबसाइट के इस्तेमाल में कठिनाई को बताया। उन्होंने कहा, "25,000 से अधिक चीजें सूचीबद्ध हैं, लेकिन तस्वीरें साफ नहीं हैं। कुछ भी ढूंढना लगभग असंभव है।"
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अन्य लोगों ने सुलभ संचार माध्यमों की कमी पर भी चिंता व्यक्त की। हादसे में अपनी मां, भाई और बेटी को खोने वाले खेड़ा के रोमिन वोरा ने उन परिवारों के संघर्षों के बारे में बताया जो डिजिटल उपकरणों से अपरिचित हैं। उन्होंने कहा, "केवल एक ईमेल आईडी है, और प्रतिक्रियाओं में 15 दिन तक लग जाते हैं। गांवों में कई लोग ईमेल का उपयोग करना भी नहीं जानते।" उन्होंने पोर्टल पर व्यक्तिगत सामान के सार्वजनिक प्रदर्शन पर भी असुविधा व्यक्त की और इसे असंवेदनशील बताया।
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