अहमदाबाद में हुए एआई 171 विमान हादसे को लगभग एक साल होने जा रहा है, लेकिन इस हादसे का दर्द आज भी सैकड़ों परिवारों की जिंदगी में जिंदा है। 260 लोगों की जान लेने वाले इस हादसे ने सिर्फ लोगों को नहीं छीना, बल्कि कई परिवारों की हिम्मत, मानसिक शांति और भविष्य के सपनों को भी तोड़ दिया। कोई आज भी अपने बेटे का आखिरी मैसेज पढ़कर रो पड़ता है, तो कोई विमान की आवाज सुनते ही डर से कांप उठता है। हादसे के बाद कई लोग अब तक सामान्य जिंदगी में लौट नहीं पाए हैं।
आखिर एआई 171 विमान हादसे ने परिवारों को कितना तोड़ दिया?
12 जून 2025 को अहमदाबाद से लंदन जा रहा एआई 171 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में 260 लोगों की मौत हुई थी। दीव के रहने वाले रफीक अरब ने अपने 25 साल के बेटे फैजान को खो दिया। फैजान ब्रिटेन में इस्लामिक स्टडीज की पढ़ाई कर रहा था और परिवार से मिलकर वापस लौट रहा था। उड़ान भरने से पहले उसने अपने पिता को मैसेज भेजा था कि पापा, मैं फ्लाइट में बैठ गया हूं और जा रहा हूं। रफीक कहते हैं कि उन्हें क्या पता था कि यह बेटे का आखिरी संदेश होगा। हादसे के बाद से उनका पूरा परिवार विमान यात्रा से डरने लगा है।
क्या विमान की आवाज अब भी लोगों को डरा देती है?
रफीक अरब बताते हैं कि हादसे के बाद उन्होंने आज तक कोई उड़ान नहीं भरी। उनके मुताबिक अब आसमान में उड़ते विमान की आवाज भी डर पैदा कर देती है। उनके परिवार के लिए हर उड़ता विमान उस दर्दनाक दिन की याद बन गया है। वहीं सूरत की रहने वाली मुक्ति वंसाडिया ने इस हादसे में अपने माता-पिता को खो दिया। उनके माता-पिता पहली बार विदेश जा रहे थे और पहली बार ही विमान में बैठे थे। वे लंदन में अपनी बेटी से मिलने जा रहे थे। मुक्ति बताती हैं कि उनके माता-पिता बच्चों की तरह खुश थे और यात्रा को लेकर बेहद उत्साहित थे।
आखिरी मुलाकात की यादें क्यों नहीं भूल पा रहे लोग?
मुक्ति वंसाडिया कहती हैं कि एयरपोर्ट पर उन्होंने अपनी मां के पैर छुए, लेकिन जल्दबाजी में पिता के पैर छूना भूल गईं। बाद में वह वापस गईं और पिता का आशीर्वाद लिया। वह पल आज भी उनके दिल में जिंदा है। कुछ घंटों बाद एक फोन कॉल ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी। हादसे के बाद मुक्ति गहरे अवसाद में चली गईं। उन्होंने ट्रैवल एजेंसी की नौकरी छोड़ दी और कई महीनों तक काउंसलिंग ली। वह बताती हैं कि आज भी विमान का नाम सुनते ही घबराहट होने लगती है और सोशल मीडिया पर हादसे से जुड़ी तस्वीरें देखकर बेचैनी बढ़ जाती है। उन्होंने अब कभी विमान में सफर नहीं करने का फैसला कर लिया है।
गांवों तक में क्यों पसरा हुआ है मातम?
बनासकांठा जिले के धनेरा गांव में रहने वाले सावधान चौधरी का परिवार भी इस हादसे से टूट गया। उनके बेटे कमलेश चौधरी और बहू धापूबेन की हादसे में मौत हो गई थी। दोनों की शादी को सिर्फ छह महीने हुए थे। कमलेश लंदन में रहता था और पत्नी का वीजा मंजूर होने के बाद उसे अपने साथ ले जा रहा था। परिवार को बेटे पर गर्व था और कमलेश ने अपने माता-पिता को भी लंदन ले जाने का सपना देखा था। लेकिन हादसे ने पूरा परिवार बर्बाद कर दिया। आज भी कमलेश की मां कमरे के एक कोने में चुपचाप बैठी रहती हैं और परिवार सदमे से बाहर नहीं निकल पाया है।
क्या हादसे के चश्मदीद भी सामान्य जिंदगी नहीं जी पा रहे?
इस हादसे का असर सिर्फ यात्रियों के परिवारों तक सीमित नहीं रहा। अहमदाबाद के अजय परमार उस समय दोपहिया वाहन से घर लौट रहे थे, जब विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ। वह गंभीर रूप से झुलस गए और दो महीने तक अस्पताल में इलाज चला। डॉक्टरों ने उन्हें धूप में काम करने से मना कर दिया, जिससे उनका माली का काम छूट गया। आर्थिक परेशानी बढ़ी और हादसे के कुछ समय बाद उनकी पत्नी भी उन्हें छोड़कर चली गई। अजय कहते हैं कि रात में अचानक नींद खुल जाती है और विमान की आवाज सुनकर डर लगने लगता है। उनके मुताबिक वह आज भी आग और चीखों वाला वह मंजर नहीं भूल पाए हैं।
क्या मानसिक जख्म भर पाना इतना आसान है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे बड़े हादसों का असर वर्षों तक लोगों के दिमाग और दिल में बना रहता है। AI 171 हादसे ने यह दिखा दिया कि किसी दुर्घटना के बाद सिर्फ आर्थिक मदद काफी नहीं होती। लोगों को लंबे समय तक मानसिक सहारे और काउंसलिंग की जरूरत पड़ती है। कई परिवार आज भी अकेलेपन, डर और अवसाद से लड़ रहे हैं। हादसे के एक साल बाद भी उनके लिए जिंदगी पहले जैसी नहीं हो पाई है।
एआई 171 विमान हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों की जिंदगी बदल देने वाली त्रासदी बन गया। इस हादसे ने यह एहसास कराया कि एक पल में किसी परिवार की पूरी दुनिया उजड़ सकती है। आज भी कई लोग अपने प्रियजनों की याद में टूट जाते हैं और हवाई जहाज की आवाज सुनते ही डर से भर जाते हैं। यह हादसा आने वाले समय के लिए भी एक चेतावनी है कि किसी त्रासदी का दर्द सिर्फ घटनास्थल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वर्षों तक लोगों के दिलों में जिंदा रहता है।