ईरान इस्राइल युद्ध की मार केवल मध्य पूर्व की उड़ानों तक सीमित नहीं है, बल्कि ब्रिटेन, यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने वाली एयर इंडिया की उड़ानें अब बहुत लंबे और घुमावदार रास्तों से गुजर रही हैं। इस वजह से ईंधन की खपत भी बढ़ गई है।
Air India: पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष ने भारतीय विमानन क्षेत्र की कमर तोड़नी शुरू कर दी है। इस बीच एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने अपने कर्मचारियों को चेतावनी दे डाली है। कैंपबेल विल्सन ने कहा कि युद्ध का असली वित्तीय झटका अभी लगना बाकी है। उन्होंने साफ कहा कि अब समय आ गया है जब कंपनी को फालतू के खर्चों पर लगाम लगानी होगी।
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आसमान में ब्लैकआउट जैसी स्थिति!
पिछले 22 दिनों से पश्चिम एशिया में जंग के हालात हैं। इस वजह से इन इलाकों से गुजरने वाले विमानों को या तो डायवर्ट किया जा रहा है या फिर रद्द करना पड़ रहा है। विल्सन ने कहा कि युद्ध शुरू होने के महज तीन हफ्तों के भीतर एयर इंडिया को मध्य पूर्व जाने वाली अपनी लगभग 2,500 उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं। फिलहाल एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस इस क्षेत्र में अपनी क्षमता का केवल 30 प्रतिशत ही परिचालन कर पा रहे हैं। कई देशों के हवाई क्षेत्र या तो पूरी तरह बंद हैं या फिर इतने असुरक्षित हैं कि वहां विमान ले जाना खतरे से खाली नहीं है।
लंबा रास्ता महंगा ईंधन
इस युद्ध की मार केवल मध्य पूर्व की उड़ानों तक सीमित नहीं है। ब्रिटेन, यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने वाली एयर इंडिया की उड़ानें अब बहुत लंबे और घुमावदार रास्तों से गुजर रही हैं। हवाई क्षेत्र पर पाबंदी की वजह से विमानों को डायवर्ट करना पड़ रहा है। इससे ईंधन की खपत में भी भारी इजाफा हुआ है। एयर इंडिया के सीईओ विल्सन ने कहा कि बाजार में कच्चे तेल और जेट ईंधन की कीमतें दोगुनी से ज्यादा हो चुकी हैं। हालांकि, इसका पूरा वित्तीय असर कंपनी के बैलेंस शीट पर अगले महीने से दिखना शुरू होगा।
यात्रियों की जेब पर बोझ
संकट को देखते हुए एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस, इंडिगो और अकासा एयर ने टिकटों पर फ्यूल सरचार्ज लगाना शुरू कर दिया है। एयर इंडिया के सीईओ विल्सन ने कहा कि हर यात्री बढ़े हुए किराए देने को तैयार नहीं होते। हम एक सीमा तक ही कीमतें बढ़ा सकते हैं, उसके बाद लोग यात्रा करना बंद कर देंगे।