ईरान युद्ध के कारण पश्चिम एशिया के हवाई क्षेत्र में लगी पाबंदियों का असर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पड़ा है। एअर इंडिया को लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है, जिससे उड़ान समय और ईंधन खपत बढ़ गई है। स्थिति को देखते हुए डीजीसीए ने पायलट ड्यूटी नियमों में अस्थायी राहत दी है।
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। ईरान और इराक के हवाई क्षेत्र में लगी पाबंदियों के कारण कई एयरलाइनों को अपने रास्ते बदलने पड़ रहे हैं। इसी स्थिति को देखते हुए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी डीजीसीए ने एअर इंडिया को कुछ समय के लिए उड़ान ड्यूटी नियमों में राहत दी है। यह छूट लंबी दूरी की उड़ानों को प्रभावित होने से बचाने के लिए दी गई है।
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सूत्रों के अनुसार एअर इंडिया को यूरोप, अमेरिका और कनाडा जाने वाली लंबी दूरी की उड़ानों के लिए यह राहत दी गई है। ईरान के ऊपर से उड़ान भरने पर लगी रोक के कारण एअर इंडिया को अब मिस्र के रास्ते होकर लंबा चक्कर लगाकर उड़ान भरनी पड़ रही है। इससे उड़ान का समय बढ़ गया है और संचालन पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है। इसी को देखते हुए डीजीसीए ने 30 अप्रैल तक कुछ नियमों में अस्थायी ढील दी है।
क्या पायलट ड्यूटी नियमों में ढील दी गई?
डीजीसीए ने पायलटों के फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन यानी एफडीटीएल नियमों में कुछ समय के लिए राहत दी है। अब एअर इंडिया कुछ लंबी दूरी की उड़ानों को दो पायलटों के साथ भी संचालित कर सकेगी। इसके साथ ही उड़ान समय की अधिकतम सीमा भी बढ़ा दी गई है। पहले अधिकतम उड़ान समय 10 घंटे था, जिसे बढ़ाकर करीब 11 से 11.30 घंटे तक कर दिया गया है।
क्या फ्लाइट ड्यूटी अवधि भी बढ़ाई गई?
नियामक ने फ्लाइट ड्यूटी पीरियड यानी एफडीपी की सीमा में भी वृद्धि की है। अब यह अवधि लगभग 11 घंटे 45 मिनट तक हो सकती है। फ्लाइट ड्यूटी पीरियड उस समय से शुरू होता है जब चालक दल ड्यूटी के लिए रिपोर्ट करता है और तब खत्म होता है जब अंतिम उड़ान के बाद विमान के इंजन बंद हो जाते हैं। इसके अलावा रोस्टर योजना में 30 मिनट के अनिवार्य बफर से भी राहत दी गई है।
क्या युद्ध के कारण उड़ानों के रास्ते बदल गए हैं?
ईरान और इराक के हवाई क्षेत्र में प्रतिबंध के कारण एयरलाइनों को वैकल्पिक रास्ते अपनाने पड़ रहे हैं। कई उड़ानें अब अरब सागर, मध्य एशिया और अफ्रीका के कुछ हिस्सों के ऊपर से होकर जा रही हैं। इससे उड़ान की दूरी और समय दोनों बढ़ गए हैं। ज्यादा दूरी तय करने से ईंधन की खपत भी बढ़ रही है और पायलटों की ड्यूटी सीमा पर दबाव बढ़ रहा है।
एअर इंडिया के संचालन पर क्या असर पड़ा?
एअर इंडिया के लिए ईरान और इराक के हवाई क्षेत्र से बचकर उड़ान भरना बड़ी चुनौती बन गया है। कई लंबी दूरी की उड़ानों का समय काफी बढ़ गया है। इसी वजह से एअर इंडिया को इस सप्ताह कई उड़ानें रद्द भी करनी पड़ीं। अभी यह साफ नहीं है कि कम लागत वाली एयरलाइन इंडिगो को भी इसी तरह की राहत मिली है या नहीं।