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पायलट की चूक या तकनीकी खामी: एअर इंडिया विमान हादसे की जांच रिपोर्ट में देरी क्यों? AAIB ने दी अहम जानकारी

Fri, 12 Jun 2026 06:36 PM IST
राकेश कुमार एएनआई, नई दिल्ली।

सार

एअर इंडिया फ्लाइट AI-171 हादसे की एक साल की जांच के बाद एएआईबी ने नई जानकारी दी है। ब्लैक बॉक्स और इंजन के डाटा का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा रहा है ताकि हादसे की असली वजह सामने आ सके। हालांकि, हादसे की जांच में अभी और कितना समय लगेगा? इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई है।  
 
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एअर इंडिया विमान हादसा - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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एअर इंडिया की फ्लाइट AI-171 हादसे की जांच अब अंतिम चरण में है। विमानन सुरक्षा बोर्ड (एएआईबी) ने इस मामले में एक अंतरिम बयान जारी किया है। बोर्ड ने साफ किया है कि पिछले एक साल से जांच टीम रात-दिन काम कर रही है। दुर्घटना से जुड़े हर छोटे-बड़े पहलू की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। इस काम में देश-विदेश के बड़े तकनीकी विशेषज्ञों और सलाहकारों की मदद ली जा रही है।
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अफवाहों और कयासों से बचने की सख्त हिदायत
जांच एजेंसी की ओर से मीडिया, जनता और सभी हितधारकों से एक विशेष अपील की गई है। एएआईबी ने आग्रह किया है कि जब तक जांच चल रही है, तब तक किसी भी तरह की अटकलों या समय से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पूरी तरह परहेज करें। एजेंसी ने फिलहाल अंतिम रिपोर्ट जारी करने की कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं की है।

ब्लैक बॉक्स और इंजन की हुई बारीकी से जांच
जांच टीम को अब तक कई बड़ी जानकारियां हाथ लगी हैं। विमान के मुख्य सिस्टम और ब्लैक बॉक्स (फ्लाइट रिकॉर्डर) के डाटा का पूरा अध्ययन कर लिया गया है। इसके साथ ही विमान के इंजन के पुर्जों और रखरखाव के पुराने रिकॉर्ड को भी खंगाला गया है। अब तक जितने भी सबूत और कागजात मिले हैं, उन सभी को मिलाकर एक बड़ी रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
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सुरक्षा और पारदर्शिता पर पूरा भरोसा
सुरक्षा बोर्ड ने भरोसा दिया है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होगी। नागरिक उड्डयन की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जहां भी जरूरत होगी, वहां दोबारा से वैज्ञानिक और तकनीकी जांच कराई जाएगी। बोर्ड का कहना है कि अंतिम फैसला केवल ठोस और सत्यापित सबूतों के आधार पर ही लिया जाएगा, जिससे विमानन क्षेत्र से जुड़े हर व्यक्ति का भरोसा बना रहे।

दोष मढ़ना नहीं, सुरक्षा बढ़ाना है असली मकसद
एएआईबी के मुताबिक, इस पूरी कवायद का उद्देश्य किसी पर दोष मढ़ना या कानूनी जवाबदेही तय करना नहीं है। दुर्घटना जांच का एकमात्र मकसद विमानन सुरक्षा को बढ़ाना है। जांच के जरिए कमियों की पहचान की जाती है, ताकि भविष्य के लिए सुरक्षा सिफारिशें जारी की जा सकें। एएआईबी ने दोहराया कि वह एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और साक्ष्य-आधारित जांच के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत सभी समीक्षाएं पूरी होते ही अंतिम रिपोर्ट दुनिया के सामने रख दी जाएगी।
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जांच में देरी की असल वजह
हादसे को एक साल बीत जाने के बाद भी जांच पूरी न होने की कुछ बड़ी वजहें हैं। एएआईबी के अनुसार, विमान के मलबे और इंजन के पुर्जों का केवल बाहरी निरीक्षण काफी नहीं था। इसके लिए कई जटिल प्रयोगशाला परीक्षण और वैज्ञानिक विश्लेषण किए जा रहे हैं, जिनमें लंबा समय लगता है। इसके अलावा, विमान के ब्लैक बॉक्स से मिले भारी-भरकम डाटा को डिकोड करना और मानवीय चूक के साथ-साथ संगठनात्मक कारणों की कड़ियों को आपस में जोड़ना एक बेहद लंबी प्रक्रिया है। बोर्ड का कहना है कि किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले हर एक साक्ष्य का पूरी तरह से सत्यापित होना जरूरी है।
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