एयर इंडिया की उड़ान में टर्बुलेंस
- फोटो : ANI
एयर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट में हुई घटना के बाद सरकार पायलटों की डोप टेस्टिंग के नियम सख्त करने की तैयारी में है। केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि सभी पायलटों की रैंडम टेस्टिंग के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। फिलहाल नियमों के तहत 10 फीसदी पायलटों की डोप टेस्टिंग होती है। मंत्रालय चाहता है कि जरूरत के मुताबिक किसी भी समय सभी पायलटों की रैंडम जांच की जा सके। हालांकि, 100 प्रतिशत टेस्टिंग से उड़ानों के संचालन पर पड़ने वाले असर का भी आकलन किया जा रहा है। डीजीसीए संबंधित पक्षों के साथ नियमों की समीक्षा कर रहा है। अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है।
4 अगस्त को फ्लाइट में हुई थी 300 फीट की गिरावट
चार अगस्त को फुकेट से दिल्ली आ रही AI 2379 अचानक करीब 300 फीट नीचे आ गए थी। एयरबस ए 320 में 3 बच्चों समेत 137 यात्री और 8 क्रू मेंबर सवार थे। घटना में कई यात्रियों को चोटें आई थीं। इसके बाद एएआईबी ने जांच शुरू की। फ्रांस की जांच एजेंसी बीईए और एयरबस के विशेषज्ञ भी जांच में सहयोग कर रहे हैं। वे एएआईबी को तकनीकी मदद देने के साथ ब्लैक बॉक्स डेटा के विश्लेषण में भी सहायता कर रहे हैं।
नशीले पदार्थों की पुष्टि हुई तो सख्त कार्रवाई
इससे पहले मंत्री राम मोहन नायडू ने एयर इंडिया के निवर्तमान सीईओ कैंपबेल विल्सन से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली थी। उन्होंने कहा था कि यात्रियों की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मंत्री ने यह भी कहा था कि एएआईबी की अंतिम जांच में पायलट के नशीले पदार्थों के सेवन या ‘सब्सटेंस एब्यूज’ की पुष्टि हुई तो सरकार सख्त कार्रवाई करेगी। मेडिकल और डोप टेस्ट के मौजूदा नियमों में कमी मिलने पर उनमें बड़े बदलाव के भी संकेत दिए थे। घटना की अंतरिम जांच रिपोर्ट अगले कुछ दिनों में आने की उम्मीद है।