विमानन कंपनी एयर इंडिया के विनिवेश की प्रक्रिया जारी है। केंद्र सरकार ने एयर इंडिया में हिस्सेदारी बेचने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) निकाला था। इसके लिए निविदा प्रक्रिया औपचारिक रूप से समाप्त हो गई है। इस बीच एयर इंडिया ने अपने कर्मचारियों को पॉलिसी मैटर से दूर रहने की हिदायत दी है।
एयर इंडिया को खरीदने के लिए बोली लगाने वालें में टाटा ग्रुप, अडाणी ग्रुप और हिंदूजा ब्रदर्स के अलावा एयर इंडिया के कर्मचारियों का एक समूह ने भी एक निजी अमेरिकी इक्विटी फंड इंटरुप्स इंक के साथ मिलकर बोली लगाई है। किसी भी प्रकार के टकराव और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए एयर इंडिया ने बोली लगाने वाली अपने कर्मचारियों को नीतिगत मामले से दूर रहने को कहा है।
कंपनी ने कहा, कर्मचारी केवल रुटीन वर्क करेंगे
एयर इंडिया ने अपने आदेश में कहा है कि एयरलाइंस को खरीदने के लिए बोली लगाने वाले सभी कर्मचारी तत्काल प्रभाव से कंपनी के किसी भी पॉलिसी मैटर में हिस्सा नहीं लेंगे। वे केवल रुटीन और डे-टू-डे वर्क करेगें। इस आदेश में कहा गया है कि ऐसे कर्मचारी कंपनी के किसी भी नीतिगत फैसलों और कंपनी की दूसरी रणनीतियों में शामिल नहीं होंगे, जिससे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से एयर इंडिया के विनिवेश प्रोग्राम पर कोई असर पड़े।
एयर इंडिया ने अपने आदेश में कहा, बोली लगाने वाले कर्मचारियों को 21 दिसंबर तक अपने विभागाधिकारी को एक औपचारिक सूचना पत्र जमा कराना होगा कि वे कंसोर्टियम ऑफ मैनेजमेंट एंप्लॉयीज का हिस्सा हैं।
बता दें कि एयर इंडिया के वाणिज्यिक निदेशक मीनाक्षी मलिक के नेतृत्व में एयर इंडिया के 229 कर्मचारियों ने अमेरिकी प्राइवेट इक्विटी फर्म इंटरुप्स इंक के साथ मिलकर एयर इंडिया को खरीदने के लिए बोली लगाई है। इस मुहिम से 200 से अधिक कर्मचारी जुड़ चुके हैं। सभी एक-एक लाख रुपये जुटा रहे हैं। एयर इंडिया में कुल 14 हजार कर्मचारी हैं।
यह है समझौता
कर्मचारियों की इंटरुप्स इंक के बीच हुई पार्टनरशिप के मुताबिक, इंटरुप्स इंक एयर इंडिया के कर्मचारियों का कंसोर्टियम अगर एयर इंडिया की हिस्सेदारी खरीदने में सफल होता है, तो इसकी 51 प्रतिशत हिस्सेदारी एयरलाइंस के कर्मचारियों की होगी और 49 प्रतिशत हिस्सेदारी इंटरुप्स इंक की होगी।