एअर इंडिया के एआई-171 विमान हादसे में मारे गए 105 से अधिक पीड़ितों के परिवारों का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील चक एन. चिओनुमा ने कहा कि एयरलाइन की ओर से कुछ परिवारों को मुआवजे और समझौते (सेटलमेंट) की शर्तें भेजी गई हैं। हालांकि, उन्होंने इन स्वीकार न करने की सलाह दी है।
वकील चिओनुमा ने कहा, तीन परिवारों को एअर इंडिया की ओर से प्रस्तावित मुआवजे और समझौते की शर्तें मिली हैं। हमने उन सभी को इसे स्वीकार न करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि एअर इंडिया के प्रस्तावित समझौते में कई मायनों में समस्याएं हैं।
चिओनुमा ने कहा, यह केवल एअर इंडिया को परिवारों की वर्तमान और भविष्य की जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं करता, बल्कि दुनियाभर की कंपनियों, विमान निर्माता, कल-पुर्जे बनाने वाली कंपनियों, विमान ऑपरेटर्स और यहां तक कि सरकारी संस्थाओं को भी दायित्व से बाहर करता है।
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'खुद को जिम्मेदारी से मुक्त करने की कोशिश कर रहा एअर इंडिया'
उन्होंने कहा कि एअर इंडिया जिस जिम्मेदारी से खुद को मुक्त करने की कोशिश कर रहा है, उसकी कोई सीमा नहीं है। इससे भी बुरी बात यह है कि दस्तावेज में परिवार और अन्य पक्ष भविष्य में किसी भी दावे के खिलाफ एअर इंडिया को सुरक्षित रखेंगे। वकील ने कहा कि किसी भो को भी ऐसे दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं करना चाहिए।
समझौते पर तुरंत हस्ताक्षर न करें पीड़ित परिवार: वकील
उन्होंने कहा, मेरा सुझाव है कि कोई भी इस समझौते पर तुरंत हस्ताक्षर न करें। पहले एअर इंडिया की जांच की जानकारी का इंतजार करें, ताकि हम जान सकें कि जिम्मेदार कौन हैं। उसके बाद आप यह आकलन कर पाएंगे कि वास्तविक नुकसान कितना है और समझौते में आपको क्या दिया जा रहा है।
उन्होंने आगे कहा, यह दस्तावेज हर उस क्षेत्राधिकार पर लागू होता है, जहां कोई दावा किया जाता है। इसमें परिवारों को इन कंपनियों के खिलाफ किसी भी दावे से बचाने और उन्हें नुकसान से मुक्त रखने का प्रावधान है, चाहे दावा कहीं भी किया जाए।