भारतीय वायु सेना में कार्यरत प्रशांत सिंह यादव अपनी नन्हीं सी बच्ची की जान बचाने के लिए विभिन्न सरकारी दफ्तरों और संस्थानों के चक्कर काट रहे हैं। गत वर्ष 31 दिसंबर को जन्मी बच्ची, जिसका नाम 'जैश्वी' है, वह एक दुर्लभ न्यूरोमस्कुलर डिसऑर्डर 'स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी' (एसपीए) टाइप-1 से पीड़ित है। प्रशांत कुमार ने अमर उजाला डॉट कॉम को बताया कि उसकी बेटी के इलाज के लिए अमेरिका से दवा आनी है। एक इंजेक्शन की कीमत 1.7 मिलियन डॉलर यानी 14 करोड़ रुपये है। यह दवा, एम्स दिल्ली द्वारा अमेरिका से आयातित की जाएगी।
दिल्ली में तैनात प्रशांत यादव ने बताया, जैश्वी की बॉडी में एसएमएन प्रोटीन नहीं बन रहा है। यह प्रोटीन शरीर को मसल पावर प्रदान करता है। ऐसे में एसएमए से ग्रसित बच्ची अपनी गर्दन सहित शरीर को नियंत्रित नहीं कर सकती। 'स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी' जो एक दुर्लभ न्यूरोमस्कुलर डिसऑर्डर है, उसकी वजह से मोटर न्यूरॉन्स का नुकसान होता है। इससे प्रगतिशील मांसपेशी खत्म हो जाती है। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी के गांव ईसई मधुपुरी प्रशांत के मुताबिक, अगर एसएमए ग्रसित बच्ची का फौरी तौर पर इलाज नहीं किया गया तो वे उसका दूसरा जन्मदिन नहीं मना सकेंगे। अंदाजा लगा सकते हैं कि एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए 14 करोड़ रुपये के इंजेक्शन का इंतजाम करना, नामुमकिन है। हालांकि यह ड्रग 'फूड ऐंड ड्रग ऐडमिनिस्ट्रेशन' (यूएसए) और ईएमए द्वारा अप्रूव्ड है, लेकिन भारत में इसे 'ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया' डीसीजीआई की मंजूरी मिलना बाकी है। यह मंजूरी न मिलने के कारण रक्षा अस्पताल भी उनकी बेटी के इलाज के लिए उक्त इंजेक्शन मुहैया नहीं करा पा रहे हैं।
प्रशांत यादव ने बताया, उन्होंने एक गैर सरकारी संगठन इम्पेक्ट गुरु पर क्राउड फंडिंग शुरु की है। अभी तक 1.82 करोड़ रुपया एकत्रित हुआ है। 14 करोड़ रुपये की भारी भरकम राशि एकत्रित करने की यह स्पीड बहुत धीमी है। उनकी बेटी को समय पर इलाज मिल सके, इसके लिए क्राउड फंडिंग की रफ्तार बढ़ानी होगी। इस मामले में भारतीय वायु सेना अपने स्तर पर मदद कर रही है। दिल्ली एम्स में जैश्वी यादव का यूएचआईडी 107594668 से पंजीकरण हुआ है। पिछले दिनों आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी का मसला उठाया था। उन्होंने एसपीए टाइप '2' से पीड़ित दो बच्चे और उनके माता-पिता को लेकर एक प्रेसवार्ता की थी। संजय सिंह ने कहा था, इस बीमारी से मुक्ति दिलाने के लिए जो इंजेक्शन लगता है, उसकी कीमत 17 करोड़ रुपये है। उन्होंने केंद्र सरकार से, पीड़ित बच्चों व उनके अभिभावकों की मदद के लिए आगे आने का आग्रह किया था। जब तक केंद्र सरकार ऐसे मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगी, तब तक उन्हें बचाना मुश्किल होगा।
आप नेता संजय सिंह ने कहा था, केंद्र सरकार को इस मसले पर पीड़ितों की बात सुननी चाहिए। सरकार, इंजेक्शन बनाने वाली अमेरिकी कंपनी नोवार्टिस को लेकर वहां की सरकार से बात करे। केंद्र सरकार, इस इंजेक्शन को सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने का प्रयास कर सकती है। उन्होंने लोगों से अपील की थी कि वे 100 रुपये से लेकर, जिसकी जितनी क्षमता है, उसके मुताबिक, पीड़ित बच्चों की मदद करें। इससे पहले फिल्म अभिनेता सोनू सूद के प्रयासों से 22 महीने के एक बच्चे को दूसरी जिंदगी मिली थी। सूद ने दुनिया के सबसे महंगे इंजेक्शन के लिए 17 करोड़ रुपये जुटाए थे। उसकी मदद से जयपुर में स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) टाइप 2 से जूझ रहे 22 महीने के बच्चे की जान बचाई गई। सूद के इस अभियान को समाज के सभी क्षेत्रों का समर्थन मिला था। तीन महीने के अंदर 9 करोड़ रुपये की राशि जुटाई गई।