कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ जंग में अब थल, वायु और नौसेना भी उतर गई हैं। तीनों सेनाओं के साझा ऑपरेशन को-जीत के तहत ऑक्सीजन की आपूर्ति बहाल की जाएगी, कोविड बेड के इंतजाम किए जाएंगे और नागरिक प्रशासन को भी महामारी से लड़ने में मदद दी जाएगी। इस अभियान के तहत लोगों की मानसिक सेहत भी दुरुस्त रखने में मदद की जाएगी।
एकीकृत रक्षा स्टाफ (चिकित्सा) की डिप्टी चीफ लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. माधुरी कानितकर ने कहा, इलाज के अलावा मरीज को यह भरोसा दिलाना बेहद जरूरी है कि वह जल्द ठीक हो जाएगा। तनाव के इस माहौल में अगर कोई आपसे बात करे तो इससे बड़ा फर्क पडे़गा।
उन्होंने कहा, हर स्वास्थ्यकर्मी की तरह ही तीनों बलों के जवान चौबीस घंटे दिन-रात काम करेंगे। मौजूदा हालात में बहुत से सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी सैन्य अस्पतालों में आ रहे हैं। दिल्ली और पुणे जैसे शहरों में हमने 500 बेड के कई अस्पताल बनाए हैं, जो पूरी तरह से रक्षा और सेवानिवृत्त सैन्यकर्मियों के लिए ही हैं। लेफ्टिनेंट जनरल कानितकर सेना में तीन स्टार जनरल की रैंक तक पहुंचने वाली तीसरी महिला हैं।
46 ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र लगाए गए
लेफ्टिनेंट जनरल कानितकर के मुताबिक, कुछ सैन्य अस्पतालों में खुद के ऑक्सीजन संयंत्र हैं। हालांकि, मौजूदा संकट में हम इस सुविधा को और बढ़ा रहे हैं। फिलहाल, कई जगहों पर 46 ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र लगाए गए हैं।
इसके अलावा, हमारे पास बडे़-बडे़ सिलिंडर और ऑक्सीजन कन्संट्रेटर की क्षमता है। वायुसेना विदेशों से ऑक्सीजन रखने के लिए कंटेनर लेकर आई है।
अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप में नौसेना ने भेजी तरल ऑक्सीजन
भारतीय नौसेना ने अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप जैसी जगहों पर तरल ऑक्सीजन पहुंचाई है। वहीं, सेना ने देश के विभिन्न हिस्सों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति करने के लिए सैन्य कोचों का इंतजाम किया है। करीत 200 ड्राइवरों को इस काम में लगाया गया है, ताकि ऑक्सीजन की आसानी से आपूर्ति की जा सके।
यह है को-जीत अभियान
लेफ्टिनेंट जनरल कानितकर ने बताया कि रक्षा विभाग ने कोविड संकट प्रबंधन समिति बनाई है और हम एकसाथ इस मोर्चे पर काम कर रहे हैं। को-जीत का मतलब है कि तीनों सेनाओं के सहकर्मी, जो मिलकर कोरोना पर जीत हासिल करेंगे। हमारी पूरी टीम पूरी ऊर्जा के साथ काम कर रही है, क्योंकि एक सैनिक विपरीत परिस्थितियों में भी काम करता है और कभी हार नहीं मानता। हम सिर्फ डॉक्टर ही नहीं, हम सैनिक हैं।