एयर चीफ मार्शल बी एस धवोआ ने कहा है कि देश की वायु सेना चीन से निबटने के लिए हर लिहाज से सक्षम है। इतना ही नहीं उनकी सेना पश्चिमी और पूर्वी मोर्चों पर एक साथ युद्ध के लिए भी तैयार है। वायु सेना दिवस केमौके पर धनोआ ने जानकारी दी कि चीनी सेना डोकलम इलाके के चूंबी घाटी में अबतक मौजूद है। हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि चीनी सेना की गर्मी में चलने वाली सैन्य अभ्यास के बाद वह चले जाएंगे।
डोकलम तनातनी खत्म होने के बाद सेना के शीर्ष अधिकारी का यह पहला बयान है। इस मौकेपर वायु सेना प्रमुख ने साफ किया कि सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कार्रवाई में हवाई ताकत के इस्तेमाल पर फैसला फोर्स नहीं बल्कि सरकार लेगी। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि क्षेत्र की भौगोलिक और सामरिक स्थिति को देखते हुए दोनों मोर्चों पर एक साथ युद्ध की संभावना बहुत कम है। लेकिन अगर ऐसे हालात बनते हैं तो वायु सेना इसके लिए पूरी तरह तैयार है।
धनोआ ने कहा कि 2032 तक वायु सेना अपने 42 स्क्वार्डन के लक्ष्य को पूरा कर लेगी। उन्होंने साफ किया कि वायु सेना में कुछ कमियां हैं जिससे निबटने के लिए प्लान बी तैयार है। वायु सेना की ताकत पाकिस्तान के मुकाबले बहुत अधिक है। लेकिन चीन के मुकाबले भारत पीछेनहीं। युद्ध की स्थिति में यह मायने नहीं रखेगा कि चीन के पास कितनी ताकत है। बल्कि महत्व इस बात का होगा कि वह उस ताकत का कितना इस्तेमाल भारत के खिलाफ करने में सक्षम है। भारत की ताकत इतनी है कि हर लिहाज से चीन को कड़ी चुनौति दी जा सकती है।
गौरतलब है कि थल सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत ने भी महीने भर पहले कहा था कि अगर चीन और पाकिस्तान एक साथ मोर्चा खोलता है सेना को कोई परेशानी नहीं होगी।