आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना यासीन अली ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के बारे में चर्चा करवाकर सरकार लोगों का ध्यान मूल मुद्दों से भटकाना चाहती है।
असलियत यह है कि पिछले साढ़े चार साल में केंद्र सरकार ने कोई भी ऐसा काम नहीं किया है जिसे वह अपनी कामयाबी के तौर पर जनता के सामने दिखा सके। यही कारण है कि उसे चुनाव हारने का डर सता रहा है, इसीलिए ऐसे मुद्दे उछाले जा रहे हैं। यासीन अली ने कहा कि जब राम मंदिर के मुद्दे पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है, और यह अपने अंतिम दौर में है, ऐसे समय में कानून बनाने की बात का कोई मतलब नहीं है।
उत्तर प्रदेश की सपा सरकार में मंत्री रहे मौलाना यासीन अली ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस बारे में अपनी राय बिल्कुल साफ कर दी है। हमें सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंजूर है, ऐसे में अब मंदिर निर्माण पर कानून बनाने की बात करना खुद सर्वोच्च न्यायालय की तौहीन है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था की हालत बेहद खराब है, अर्थव्यवस्था की हालत बदतर हो गई है। पेट्रोल के दामों में आग लगी हुई है और रुपया रसातल में जा रहा है। सरकार को उसे संभालना चाहिए लेकिन सरकार अपने इन मूल कर्तव्यों को निभाने की बजाय मंदिर मुद्दे को उछाल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार के इन ढकोसलों से वह बचने वाली नहीं है और उसकी हार तय है।
इसके पूर्व, विश्व हिंदू परिषद के सन्त उच्चाधिकार समिति की बैठक शुक्रवार को दिल्ली में हुई। संतों ने इस बैठक में केंद्र सरकार को रामममन्दिर निर्माण के लिए कानून बनाने का आदेश दिया। संतों ने बैठक के बाद राष्ट्रपति से भी मुलाकात की और उनसे सरकार को कानून बनाने का निर्देश देने की मांग की।