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Maharashtra: 'हम क्या खाएं, सरकार न बताए...', मीट बैन के खिलाफ AIMIM के पूर्व सांसद ने रखी बिरयानी पार्टी

Fri, 15 Aug 2025 05:47 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छत्रपति संभाजीनगर।

सार

Maharashtra: एआईएमआईएम नेता इम्तियाज जलील ने छत्रपति संभाजीनगर में त्योहारों पर मांस पर प्रतिबंध के विरोध में अपने घर पर बिरयानी पार्टी आयोजित की। उन्होंने कहा कि सरकार को यह तय करने का अधिकार नहीं कि लोग क्या खाएं और क्या नहीं। 
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इम्तियाज जलील - फोटो : एक्स/इम्तियाज जलील
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विस्तार
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छत्रपति संभाजीनगर में एआईएमआईएम नेता इम्तियाज जलील ने शुक्रवार को अपने घर पर बिरयानी पार्टी का आयोजन किया। यह बिरयानी पार्टी उन्होंने नगर निगम के उस आदेश के खिलाफ रखी थी, जिसमें त्योहारों के चलते शहर में मांस की दुकानें बंद रखने को कहा गया था। जलील ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी निशाना साधा और पूछा कि उन्होंने नगर आयुक्त को यह आदेश वापस लेने के लिए निर्देश क्यों नहीं दिया।
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इस साल स्वतंत्रता दिवस और भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का पर्व गोकुल अष्टमी एक ही दिन यानी शुक्रवार को मनाया जा रहा है। छत्रपति संभाजीनगर नगर निगम ने मंगलवार को एक आदेश जारी कर कहा था कि 15 और 20 अगस्त को शहर की सीमा में सभी मांस की दुकानें, बूचड़खाने और मांस बेचने वाले प्रतिष्ठान बंद रहेंगे।

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इस आदेश के मुताबिक, 15 अगस्त को गोकुल अष्टमी और 20 अगस्त को 'पर्यूषण पर्व' के चलते मांस की बिक्री पर रोक रहेगी। पर्यूषण पर्व जैन समाज का एक प्रमुख त्योहार है, जिसमें उपवास और प्रार्थना की जाती है। एआईएमआईएम नेता और पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने इस फैसले का विरोध जताने के लिए अपने घर पर बिरयानी पार्टी रखी।

जलील ने मीडिया से बातचीत में कहा, मैंने चिकन बिरयानी के साथ एक शाकाहारी व्यंजन भी बनाया है। अगर नगर आयुक्त सिर्फ शाकाहारी खाना मांगेंगे तो मैं उन्हें वही परोस दूंगा, लेकिन सरकार को यह नहीं बताना चाहिए कि हमें क्या खाना चाहिए और क्या नहीं। उन्होंने कहा कि इस तरह की चीजें बंद होनी चाहिए। उन्होंने अफसोस जताया कि यह मांस पर रोक लगाने का फैसला स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लिया गया।

फडणवीस पर निशाना साधते हुए जलील ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री नगर आयुक्त को आदेश वापस लेने को कह देते तो मामला वहीं खत्म हो जाता। जलील ने सवाल किया, वह कहते हैं कि आप मांस खा सकते हैं लेकिन बाजार में मिलेगा नहीं। सरकार ऐसा आदेश देकर क्या हासिल करना चाहती है? जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि यह रोक गोकुल अष्टमी के चलते है, तो उन्होंने पलटकर पूछा, क्या यह त्योहार केवल कुछ जिलों में ही मनाया जा रहा है? पूरे राज्य में हिंदू इसे मना रहे हैं। अगर सरकार ने इस बारे में कोई स्पष्ट नीति बनाई होती तो हम उसका सम्मान करते। 

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उन्होंने कहा कि कुछ ज्यादा उत्साही नगर आयुक्त सरकार को खुश करने के लिए इस तरह के आदेश निकाल रहे हैं। मुसलमानों के केवल दो बड़े त्योहार होते हैं – रमजान और बकरीद। क्या सरकार इन दो दिनों पर शराब की दुकानें बंद कराएगी? छत्रपति संभाजीनगर के अलावा नागपुर, नासिक और मालेगांव के नगर निगमों ने भी ऐसे ही आदेश दिए, जिससे विवाद खड़ा हो गया और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठने लगे।

विपक्षी दलों ने इस फैसले की आलोचना की है। जबकि भाजपा का कहना है कि स्वतंत्रता दिवस पर बूचड़खाने बंद करने की परंपरा 1988 से चली आ रही है, जब शरद पवार मुख्यमंत्री थे। उन्होंने पूछा कि क्या अब विपक्ष शरद पवार से भी इस पर सवाल करेगा? मुख्यमंत्री फडणवीस ने बुधवार को कहा कि राज्य सरकार लोगों के खाने की पसंद पर रोक लगाने में रुचि नहीं रखती और मांस बिक्री पर रोक के मामले को 'अनावश्यक विवाद' बताया।

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