बुजुर्गों को अपने घर में बैलेंस बनाकर रहने की सीख देने के लिए एम्स ने साथी और सहारा नाम से नई तकनीक पर काम शुरू कर दिया है। इसके तहत कूल्हा, स्पाइन जैसी परेशानी लेकर एम्स आने वाले बुजुर्ग मरीजों को इन तकनीक के जरिए बैलेंस बनाना सिखाया जा रहा है।
ताकि बाथरूम में और सीढ़ियों पर चढ़ते वक्त बुजुर्ग अपना ध्यान रख सकें। डॉक्टरों के मुताबिक ज्यादातर बुजुर्गों को फ्रेक्चर होने की वजह बाथरूम में या सीढ़ी से गिरना है। एम्स का दावा है कि 65 वर्ष से ज्यादा की आयु में एक बार कूल्हा टूटने के बाद दोबारा या तीसरी बार फ्रैक्चर होने की संभावना ज्यादा रहती है।
बुजुर्गों के लिए 20 बेड, एक ओटी
एम्स के जीरिएट्रिक विभागाध्यक्ष डॉ. एबी डे ने बताया कि उनके विभाग की नई इमारत में बुजुर्गों के लिए 20 बिस्तर और एक ऑपरेशन थियेटर बनाया जा रहा है। ताकि फ्रैक्चर के मरीजों को तत्काल उपचार दिया जा सके। उन्हें सर्जरी कराने के लिए इधर उधर परेशान न होना पड़ा।
डॉ. राजेश मल्होत्रा का कहना है कि जिन बुजुर्गों को दो से ज्यादा बीमारियां हैं। वे घर पर हर दिन इन बीमारियों से बचाव के लिए दवाओं का सेवन कर रहे हैं। उनमें सीढ़ी से या बाथरूम में गिरने की संभावना कई गुना ज्यादा है।