हैदराबाद विश्विविद्यालय में जंगल कटाई के मामले में विरोध लगातार बढ़ता ही जा रहा है। छात्रों के विरोध और कई सारे दावों के बीच एआईसीसी की पार्टी मामलों की प्रभारी मीनाक्षी नटराजन ने राज्य सरकार से एक बड़ी अपील की है। उन्होंने इस मामले में सभी संबंधित पक्षों के साथ चर्चा करने की अपील की है।
तेलंगाना में कांचा गाचीबाउली गांव में 400 एकड़ इलाके में फैले जंगल की कटाई का मामले में विरोध बढ़ता ही जा रहा है। हैदराबाद विश्वविद्यालय के कई छात्र संघ सरकार के इस फैसले के विरोध में कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे है। इसी बीच इस मामले में एआईसीसी की पार्टी मामलों की प्रभारी मीनाक्षी नटराजन ने राज्य की डीएमके सरकार से हैदराबाद विश्वविद्यालय के पास स्थित 400 एकड़ भूमि के मुद्दे पर सभी संबंधित पक्षों के साथ चर्चा करने की अपील की है।
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सरकार को सुननी चाहिए छात्रों की अपील- नटराजन
जंगल कटाई को लेकर बढ़ते विवाद के बीच कांग्रेस नेता नटराजन ने कहा कि सरकार को छात्रों और अन्य लोगों की आपत्तियों को सुनना चाहिए और भूमि से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए। इसके साथ ही, सरकार को सभी हितधारकों के साथ विचार-विमर्श करना चाहिए। नटराजन ने शनिवार को तेलंगाना में आते ही यह बयान दिया। साथ ही उम्मीद जताई कि इस मुद्दे पर नागरिक समाज समूहों से भी बैठकें की जाएंगी।
आज छात्रों से मुलाकात कर सकती है नटराजन
कांग्रेस नेता ने कहा कि कांचा गचीबोवली की जमीन राज्य सरकार की है और मौजूदा सरकार ने अदालतों में लड़ाई लड़ी और इसे अपने कब्जे में रखा है। वहीं इस मामले में विश्वविद्यालय सूत्रों ने बताया कि कुछ छात्र समूह और कर्मचारी रविवार को कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन से मुलाकात कर सकते हैं। हालांकि, यूओएच छात्र संघ के अध्यक्ष उमेश अंबेडकर ने कहा कि मंत्री समिति की ओर से आधिकारिक बातचीत के लिए कोई निमंत्रण नहीं मिला है।
क्या है पूरा विवाद, समझिए
गौरतलब है कि तेलंगाना सरकार ने कांचा गचीबोवली में आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए 400 एकड़ जमीन विकसित करने की योजना बनाई है, जिससे विश्वविद्यालय के छात्रों का विरोध शुरू हो गया है। छात्रों का कहना है कि यह जमीन विश्वविद्यालय की है, जबकि राज्य सरकार का कहना है कि यह उनके कब्जे में है और उन्होंने यूओएच को इसके बदले करीब समान जगह आवंटित की है। इस मुद्दे की सुनवाई तेलंगाना उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में हो रही है। हालांकि बढ़ते विवाद को देखते हुए साइबराबाद पुलिस ने सार्वजनिक शांति को बनाए रखने के लिए 4 अप्रैल को 400 एकड़ भूमि क्षेत्र में लोगों के प्रवेश पर 16 अप्रैल तक प्रतिबंध लगा दिया था। इस मामले की सुनवाई अब तेलंगाना उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट में हो रही है।