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AI Summit: फर्जी कॉल पकड़ने वाला देसी AI एप देश में अव्वल, छत्तीसगढ़ के इस भाई-बहन ने किया कमाल

Thu, 19 Feb 2026 03:57 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अमर उजाला डिजिटल चर्चा में एप बनाने वाले अनुराग मानिक का कहना है, भारत में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों के दौर में कर्तव्य जैसे टूल आम नागरिकों के लिए मजबूत डिजिटल सुरक्षा कवच साबित हो सकता है।  यह हिंदी, तेलुगु, तमिल, मलयालम, गुजराती, कन्नड़, मराठी, अंग्रेजी और छत्तीसगढ़ी सहित कुल 8 भाषाओं में आवाज की पहचान कर सकता है।
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एआई हैकाथॉन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश भर में साइबर ठगी आज एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। रोज़ाना लोगों को फर्जी कॉल, नकली लोन ऑफर और बैंक डिटेल्स मांगने वाले धोखाधड़ी के मामलों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे समय में छत्तीसगढ़ के भाई बहन द्वारा विकसित किया गया एप 'कर्तव्य' लोगों के लिए उम्मीद लेकर आया है।

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भारत मंडपम में आयोजित देश के सबसे बड़े एआई हैकाथॉन में छत्तीसगढ़ के भाई-बहन की इस जोड़ी ने एक ऐसा स्मार्ट ऐप बनाकर पहला स्थान हासिल किया है, जो साइबर ठगों की चाल को पहले ही पकड़ सकता है। दरअसल, आईटी मंत्रालय के एआई इम्पैक्ट समिट के तहत आयोजित इस प्रतियोगिता में करीब 40 हजार प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। कड़ी छंटनी के बाद सिर्फ 800 प्रतिभागी ही फाइनल राउंड में पहुंच पाए। अंतिम चरण में टीम ने अपने समाधान को और बेहतर बनाते हुए कई भारतीय भाषाओं को भी शामिल किया और टॉप-6 में जगह बनाई। उद्योग जगत के विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों के सामने प्रस्तुति देने के बाद इस टीम ने पूरे देश में पहला स्थान हासिल कर लिया।

ऐसे करता है एप काम
टीम द्वारा तैयार किया गया एआई ऐप किसी भी आवाज को सुनकर तुरंत पहचान लेता है कि, कॉल करने वाला असली इंसान है या एआई से बनाई गई नकली आवाज। इतना ही नहीं, यह यह भी समझ जाता है कि सामने वाला व्यक्ति लोन स्कैम या बैंक डिटेल्स फ्रॉड जैसी साइबर ठगी करने की कोशिश तो नहीं कर रहा। ऐप हिंदी समेत सात भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी को समझने में सक्षम है, जिससे देश के अलग-अलग हिस्सों के लोग सुरक्षित रह सकते हैं। इस उपलब्धि के पीछे अनुराग मानिक की तकनीकी मेहनत और उनकी बहन अनुराग मानिक की डिजाइन समझ का बड़ा योगदान रहा है। अनुराग जनरेटिव एआई में प्रशिक्षित और आईबीएम से प्रमाणित एआई एजेंट डेवलपर हैं। जबकि आस्था ने एआई सॉल्यूशंस डिजाइनर के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोनों की इस सफलता को डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।
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विशेषज्ञों का कहना है, अगर ऐसे एआई टूल्स का व्यापक उपयोग शुरू होता है तो आम लोगों को फोन पर होने वाली ठगी से काफी हद तक बचाया जा सकता है। जिस तरह साइबर अपराधी नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, उसी गति से ऐसे स्वदेशी तकनीकी समाधान विकसित होना बेहद जरूरी है। अमर उजाला डिजिटल चर्चा में अनुराग का कहना है, भारत में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों के दौर में कर्तव्य जैसे टूल आम नागरिकों के लिए मजबूत डिजिटल सुरक्षा कवच साबित हो सकता है।  यह हिंदी, तेलुगु, तमिल, मलयालम, गुजराती, कन्नड़, मराठी, अंग्रेजी और छत्तीसगढ़ी सहित कुल 8 भाषाओं में आवाज की पहचान कर सकता है। वे बताते हैं कि इस ऐप की प्रेरणा एक व्यक्तिगत अनुभव से मिली। उनके एक करीबी मित्र साइबर फ्रॉड का शिकार हुए थे। उसी दौरान वे एक एआई प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। तब उन्होंने सोचा कि एआई से हो रहे स्कैम को एआई की मदद से ही रोका जाए। इसके बाद उन्होंने अपनी बहन आस्था माणिक के साथ मिलकर कर्तव्य ऐप का विकास शुरू किया। आस्था का कहना है,कर्तव्य ऐप में उपयोगकर्ता किसी भी ऑडियो फाइल को अपलोड कर सकता है या लाइव रिकॉर्डिंग कर सकता है। ऐप उस आवाज का विश्लेषण कर यह बताता है कि वह एआई जनरेटेड है या वास्तविक मानव आवाज। साथ ही यह भी संकेत देता है कि कॉल किसी संभावित लोन स्कैम या बैंक डिटेल्स फ्रॉड से जुड़ी हो सकती है।

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छत्तीसगढ़ का स्टॉल बना आकर्षण का केंद्र
भारत मंडपम में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में छत्तीसगढ़ द्वारा स्थापित स्टॉल देश-विदेश से आए निवेशकों, तकनीकी विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों और आगंतुकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। छत्तीसगढ़ ड्रिवन बाय इंटेलिजेंस थीम पर आधारित इस स्टॉल में राज्य की उभरती कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) क्षमता, अत्याधुनिक डिजिटल अधोसंरचना और निवेश संभावनाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा रहा है। स्टॉल में विशेष रूप से नवा रायपुर में स्थापित किए जा रहे देश के पहले एआई डाटा सेंटर पार्क की जानकारी प्रमुखता से दी जा रही है।

जानकारी के अनुसार इस महत्वाकांक्षी परियोजना में लगभग 1000 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है तथा इसमें एक लाख तक ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (जीपीयू) स्थापित किए जाने की क्षमता विकसित की जाएगी। यह डाटा सेंटर पार्क देश में एआई आधारित सेवाओं, उच्च क्षमता डाटा प्रोसेसिंग और डिजिटल नवाचार को नई गति प्रदान करेगा। स्टॉल पर डिजिटल प्रस्तुति, सूचना पैनल के माध्यम से छत्तीसगढ़ की औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंतर्गत एआई, रोबोटिक्स और उन्नत प्रौद्योगिकी क्षेत्रों के लिए उपलब्ध विशेष प्रोत्साहनों, अनुदानों और निवेश-अनुकूल वातावरण की जानकारी भी दी जा रही है। राज्य में निर्बाध विद्युत आपूर्ति, विकसित हो रहा नवा रायपुर स्मार्ट सिटी, उत्कृष्ट कनेक्टिविटी और उद्योग-हितैषी नीतियों को निवेशकों के समक्ष प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है।
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स्टॉल पर मौजूद अधिकारियों द्वारा निवेशकों और आगंतुकों को राज्य में उपलब्ध अधोसंरचना, निवेश अवसरों और नीतिगत प्रोत्साहनों की विस्तृत जानकारी प्रदान की जा रही है। इस दौरान कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों तथा तकनीकी संस्थानों के प्रतिनिधियों ने छत्तीसगढ़ में एआई और डाटा सेंटर क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं में विशेष रुचि दिखाई और राज्य सरकार की दूरदर्शी पहल की सराहना की।

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