सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुचिच ने कहा कि भारत सिर्फ तकनीकी प्रतिस्पर्धा में शामिल नहीं है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को मानव कल्याण, समावेशी विकास और नैतिक उपयोग से जोड़कर दुनिया को नई दिशा दे रहा है। भारत आज एआई को लेकर होने वाले वैश्विक विमर्श का प्रमुख केंद्र बन चुका है।
राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुचिच ने कहा कि कुछ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को एआई के क्षेत्र में द्वितीय श्रेणी की शक्ति बताने की कोशिश की गई, लेकिन यह आकलन वास्तविकता से दूर है। भारत की नीति व्यावहारिक और जनोन्मुखी है, जो उसे वैश्विक नेतृत्व की अग्रिम पंक्ति में स्थापित करती है। उन्होंने कहा कि भारत का ध्यान सिर्फ अत्याधुनिक तकनीक विकसित करने पर नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और वित्तीय समावेशन जैसे क्षेत्रों में एआई के प्रभावी उपयोग पर है। यह दृष्टिकोण भारत को जिम्मेदार और नैतिक तकनीकी शक्ति के रूप में पहचान दिला रहा है। वुचिच ने सोशल मीडिया पर एआई इम्पैक्ट समिट की तस्वीर साझा की और इसमें न्योते के लिए पीएम मोदी को धन्यवाद दिया। पीएम मोदी ने भी उनका आभार प्रदर्शित किया।
इस विकास यात्रा में पीएम मोदी की भूमिका अहम
राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुचिच ने पीएम नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि इस विकास यात्रा में उनकी भूमिका अहम है। उन्होंने सुनिश्चित किया कि नई तकनीक का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। भारत एआई के जरिये भविष्य को सिर्फ अपनाने वाला देश नहीं, बल्कि भविष्य को गढ़ने वाला राष्ट्र बन चुका है।
भारतीय ट्रेनों की सफाई की निगरानी एआई के जिम्मे
भारतीय रेलवे ने एआई से ट्रेन में साफ-सफाई की निगरानी शुरू कर दी है। रेलवे सूचना केंद्र में चीफ प्रोजेक्ट इंजिनियरिंग लक्ष्मण जैन ने बताया कि अब ट्रेन में एआई साफ-सफाई की निगरानी करेगा। पायलट प्रोजेक्ट में देशभर में करीब 100 ट्रेनों में एआई आधारित सफाई की निगरानी का काम शुरू हुआ है। इसमें, सबसे पहले साफ-सफाई विभाग का स्टाफ ट्रेन में चढ़ते ही अपनी लाइव फोटो ऐप पर अपलोड करता है। टायलेट को साफ करते ही उसकी फोटो भी अपलोड करनी होगी। स्टाफ के जाने के बाद एआई उन फोटो का स्टडी करके रिपोर्ट देता है कि सफाई सही तरीके से हुई या नहीं। यदि एआई को लगता है कि सफाई के तय मानकों के तहत टायलेट साफ नहीं हुआ है तो संबंधित कर्मी और उसके ठेकेदार को चेतावनी के साथ जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है।
एआई से पता करें ट्रेन टिकट कंफर्म होगा या नहीं
अक्सर गर्मियों, दीपावली, होली, छठ पूजा के समय पर यात्री ट्रेन टिकट को लेकर बेहद परेशान रहते हैं। क्योंकि स्पेशल ट्रेन चलाने के बाद यह पता नहीं होता है कि किस ट्रेन में उनका टिकट कंफर्म होगा या नहीं। भारतीय रेलवे इसका हल निकालने जा रही है। इसके लिए रेलवे वन एप शुरू किया गया है। इसमें आसानी से पता लग जाएगा कि कौन-सा टिकट कंफर्म होगा और कौन-सा वेट लिस्ट में रहेगा। उदाहरण के तौर पर, आपको दिल्ली से कोलकात्ता जाना है तो उस रूट की ट्रेन में एससी थ्री में 40 वेटलिस्ट दिखा रहा है। ऐसे में एआई ठीक उसके सामने प्रतिशत में संभावनाएं बताएगा कि आपका टिकट कंफर्म होगा या नहीं। यदि आपके टिकट के सामने कंफर्म होने का प्रतिशत 80 से ऊपर है तो इसका मतलब है कि आपका वेटिंग लिस्ट कंफर्म हो सकता है।
बिजली क्षेत्र की जटिलताओं का निकलेगा समाधान: आईईए विशेषज्ञ
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के एक विशेषज्ञ ने कहा कि एआई का समावेश बिजली क्षेत्र की बढ़ती जटिलताओं निपटने में मदद कर सकता है। खासकर भारत जैसे देशों में जहां कुछ वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ने के आसार हैं। आईईए के ऊर्जा विशेषज्ञ सिद्धार्थ सिंह ने स्वच्छ ऊर्जा बदलाव को गति देने में एआई का उपयोग विषय पर आयोजित परिचर्चा में कहा, हम ऊर्जा क्षेत्र में खासकर बिजली प्रणालियों में, जटिलता के तेजी से बढ़ते रुझान देख रहे हैं। अब ऊर्जा का अंतिम उपयोग अन्य ईंधनों की तुलना में अधिक बिजली पर निर्भर हो गया है।
प्रणाली में अब परिवर्तनीय नवीकरणीय बिजली की मात्रा कहीं अधिक हो गई है, जो पहले कभी नहीं थी। पहले बिजली के अधिकतर स्रोत स्थिर होते थे लेकिन अब सौर एवं पवन ऊर्जा के कारण स्थिति बदल चुकी है। बदली स्थिति में अस्थिरता को संभालने के लिए बैटरी की जरूरत होती है, ताकि उतार-चढ़ाव को संतुलित किया जा सके और इसके साथ ही नए तरह के बाजार भी उभर रहे हैं। उन्होंने कहा, एक और बड़ा बदलाव यह है कि अब हमारे पास दीर्घकालिक लक्ष्य हैं, जो पहले नहीं थे। अब ऐसी प्रणालियों की जरूरत है जो अधिक स्वचालित हों और यहीं कृत्रिम मेधा की भूमिका सामने आती है। उन्होंने कहा, सौर और पवन ऊर्जा के लिए हर मिनट निगरानी या किसी खास स्थान पर बादलों की स्थिति को समझना जरूरी है...इसी तरह के समाधान भारत के लिए सबसे अधिक उपयोगी साबित होंगे।
बंदरगाहों पर एआई के इस्तेमाल से 20 हजार करोड़ बचेंगे
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के सदस्य गौरव वल्लभ ने कहा कि भारत को नई प्रौद्योगिकी अपनाने की जरूरत है और बंदरगाहों पर माल ढुलाई प्रबंधन के लिए एआई प्रौद्योगिकी का उपयोग करके 20,000 करोड़ रुपये तक की बचत की जा सकती है।
वल्लभ ने एआई-पावर्ड पोर्ट्स: रीइमेजिनिंग एफिशिएंसी एंड ऑपरेशंस सत्र में कहा कि भारत नई प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक वैश्विक अगुवा के तौर पर उभर रहा है। हमारे संचालन में एआई के उपयोग से लगभग 20,000 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है....और जहां तक लॉजिस्टिक लागत का सवाल है, हम हर साल 15,000 करोड़ रुपये बचा सकते हैं। वल्लभ ने कहा, सवाल यह नहीं है कि क्या एआई भारत के बंदरगाहों को बदल देगा, सवाल यह है कि हम इसका नेतृत्व करने जा रहे हैं या नहीं। उन्होंने कहा, भारत की लॉजिस्टिक्स लागत सकल घरेलू उत्पाद का 7.97 प्रतिशत है जो प्रतिस्पर्धी है, लेकिन विकासित भारत के 2047 के लक्ष्य के लिए, हमारे बंदरगाहों का पारिस्थितिकी तंत्र प्रौद्योगिकी आधारित होना चाहिए।
स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई के प्रभावी इस्तेमाल में नैतिकता महत्वपूर्ण
विज्ञान और प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई का अधिकतम और सही उपयोग सुनिश्चित करने में नैतिक मानदंडों की भूमिका बेहद अहम होगी। सरकार के बहुभाषी एआई इंजन भारतजेन का उदाहरण देते हुए कहा, मौजूदा सरकार किसी भी नई पहल या उभरती तकनीक के प्रारंभिक चरण में ही आगे आकर भूमिका निभाने के लिए तैयार है। जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारतजेन सरकारी स्वामित्व वाला संप्रभु मॉडल है, लेकिन निजी क्षेत्र में भी डिजिटल स्वास्थ्य और डिजिटल केस हिस्ट्री जैसे मॉडल पर काम हो रहा है। उन्होंने कहा, आने वाले समय में हमें भी एकीकृत होना पड़ेगा। न तो वे अकेले काम कर सकते हैं, न ही हम। इसलिए, हमें इसके लिए तैयार रहना होगा।
विदेशी एआई मॉडल पर निर्भर नहीं रह सकते: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की महानिदेशक चंद्रिका कौशिक ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी एआई समाधानों की तत्काल जरूरत है। भारत महत्वपूर्ण सैन्य अनुप्रयोगों के लिए विदेशी एआई मॉडलों पर निर्भर नहीं रह सकता। हमें उन मॉडलों व प्रणालियों की विश्वसनीयता के बारे में पूरी तरह से आश्वस्त होना होगा, जिन्हें हम अपना रहे हैं।
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तकनीक फायदेमंद...पर नहीं ले सकती डॉक्टरों की जगह
एआई को रोग निगरानी और रोकथाम से लेकर निदान और उपचार तक संपूर्ण स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एकीकृत किया गया है। लेकिन चिकित्सा केवल विज्ञान नहीं बल्कि कला भी है। स्वास्थ्य सेवा सिर्फ एल्गोरिदम पर नहीं, मानवीय स्पर्श, सहानुभूति, करुणा और संचार पर भी निर्भर करती है। ये ऐसे गुण हैं जिनकी नकल मशीनें नहीं कर सकतीं और ये हमेशा चिकित्सकों के अधिकार क्षेत्र में रहेंगे। केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने मंगलवार को इस टिप्पणी के साथ ऐसी आशंकाओं को निराधार करार दिया कि एआई डॉक्टरों की जगह ले सकता है। उन्होंने इस पर भी जोर दिया कि यह प्रौद्योगिकी पूरे चिकित्सा जगत के लिए फायदेमंद साबित होगी।
एआई इम्पैक्ट समिट में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री ने कहा कि एआई का उद्देश्य संवर्धन और सहायता करना है, चिकित्सकों को प्रतिस्थापित करना नहीं। नियमित और उच्च गहन कार्यों के बोझ को कम करके एआई डॉक्टरों को जटिल मामलों और महत्वपूर्ण नैदानिक निर्णय लेने के लिए अधिक समय देने में सक्षम बनाता है।
जटिल मामलों पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे विशेषज्ञ : केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने रोग निगरानी से लेकर रोकथाम, निदान और उपचार तक संपूर्ण स्वास्थ्य प्रणाली में एआई को एकीकृत कर लिया है। अनुप्रिया ने कहा, रोजमर्रा के साधारण और अधिक संख्या में आने वाले मामले एआई निपटाएगा और चिकित्सक या हमारे विशेषज्ञ जटिल मामलों या नैदानिक फैसले लेने पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।