कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के पूरी तरह उपयोग में आने से विभिन्न सेक्टर पर क्या असर पड़ेगा, इस पर लगातार चर्चा जारी है, लेकिन टेलीकॉम सेक्टर के विशेषज्ञों का मानना है कि एआई इस सेक्टर में हो रहे फ्रॉड को रोकने में पूरी तरह सक्षम है। एआई के सही उपयोग से उपभोक्ताओं तक आने वाली हर फर्जी कॉल को न केवल पकड़ा जा सकता है, बल्कि फ्रॉड करने वालों की सटीक पहचान कर ऐसे अपराधों को हमेशा के लिए रोका भी जा सकता है। इतना ही नहीं, एआई भविष्य में कॉल और मैसेज करने के तरीकों को पूरी तरह बदल सकता है।
एआई की सबसे बड़ी क्षमता सेकंड के हजारवें-लाखवें हिस्से में ही बड़ी-बड़ी गणनाएं करने में है। एआई की इसी क्षमता का उपयोग हर सेकंड हो रहे लाखों कॉल्स और करोड़ों संदेशों के मूल स्रोत को पढ़कर किसी फर्जी कॉल-संदेश को रोकने में किया जा सकता है। टेलीकॉम सेवा प्रदाता कंपनियों का भी मानना है कि एआई अपने उपभोक्ताओं के व्यवहार का अध्ययन कर किसी अनजान खतरे की पहचान करने में सक्षम होगा।
पूरी तरह बदल जाएगा कॉल करने का तरीका
टेलीकॉम सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर काम कर रहे डॉ. हिमांशु पोखरियाल ने अमर उजाला से कहा कि इस सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर रिसर्च जारी है। लेकिन अब तक के उपयोग से यह स्पष्ट हो गया है कि अब तक स्मार्ट फोन से नंबर डायल करना उसी तरह बीते दिनों की बात हो जाएगी जिस तरह लैंडलाइन फोन से नंबर डायल करना अब पिछले जमाने की बात हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इस समय भी स्मार्ट फोन में ऐसी तकनीक उपलब्ध है जो उपभोक्ताओं को केवल बोलकर किसी व्यक्ति को फोन करने, संदेश करने की सुविधा देता है, लेकिन अभी यह तकनीक प्राथमिक स्तर पर है जिसके कारण इस तरह पूरी सटीकता के साथ कॉल-संदेश नहीं भेजे जा पाते।
लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इस अनुभव को पूरी तरह बदलने जा रहा है। आने वाले समय में कॉल करने के लिए फोन उठाने की भी आवश्यकता नहीं होगी और केवल बोलकर भी किसी व्यक्ति को पूरी सटीकता के साथ कॉल किया जा सकेगा। इतना ही नहीं, भविष्य में किसी भी समय किसी को एक निश्चित संदेश देने के लिए भी प्रोग्राम किया जा सकेगा। इससे आप कोई भी कॉल, मैसेज या ई मेल सही समय पर भेजने से नहीं चूकेंगे।
आपके लोगों की पहचान करने में होगा सक्षम
डॉ. हिमांशु पोखरियाल ने कहा कि इस समय लोगों के साथ सबसे बड़ा साइबर फ्रॉड यह कहकर किया जा रहा है कि फ्रॉड करने वाले किसी पुलिस या सुरक्षा एजेंसी से बोल रहे हैं और इसके बाद उन्हें साइबर अरेस्ट कर उनसे पैसे उगाह लिए जाते हैं। कई बार यही काम लोगों के प्रिय जनों के नाम पर किया जाता है। लेकिन यदि टेलीकॉम कंपनियां अपने स्तर पर पूरी तरह एआई की क्षमता का उपयोग करें तो ऐसे किसी भी कॉल को सेकंड से कम समय में पकड़ा जा सकता है और ऐसे अपराधों पर पूरी तरह लगाम लग सकती है।
38 प्रतिशत ट्रैफिक एआई से आएगा
एक टेलीकॉम कंपनी के उच्च अधिकारी मनोज गुरनानी ने कहा कि एआई के उपयोग से लोग डरे हुए हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि यह बहुत तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है। केवल पांच से सात वर्षों के बीच इंटरनेट पर आने वाली ट्रैफिक का 38 प्रतिशत हिस्सा केवल एआई के जरिए आएगा। समय के साथ यह बढ़ता रहेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे में यदि भारत की कंपनियां अपने यहां एआई की पूरी क्षमता का उपयोग नहीं करेंगी तो वे इस दौड़ में पूरी तरह पिछड़ जाएंगी।
अपनी समस्याओं का समाधान भी पेश करेगा एआई
टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के सदस्य रितु रंजन मित्रा ने कहा कि एआई और सोशल मीडिया नए समय की चीजें हैं, लेकिन जिस तरह हाल ही में एआई के दुरुपयोग की घटनाएं सामने आई हैं, यह आवश्यक हो गया है कि सरकार एआई और टेलीकॉम सेक्टर में नैतिकता के उच्च मापदंडों को लेकर सख्त नियम बनाए। अन्यथा इसके नकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं। हालांकि, सेक्टर के विशेषज्ञ मानते हैें कि एआई जिस तरह की समस्याएं पैदा कर रहा है, जल्द ही वह अपनी समस्याओं का उचित समाधान भी पेश करेगा।
एसटीपीआई के महानिदेशक अरविंद कुमार ने कहा कि देश के शैक्षणिक संस्थाओं, स्टार्ट अप और एआई आधारित नवाचार को एक साथ एक मंच पर लाने से इस सेक्टर का बहुत अच्छे तरीके से उपयोग किया जा सकता है। इससे भारत की आर्थिक तरक्की को तेज गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि इंडिया इंपैक्ट समिट 2026 में इस विषय पर सभी समस्याओं का समाधान पेश करेगा। इसमें इस सेक्टर में काम कर रही देश की नए स्टार्टअप से लेकर दिग्गज कंपनियों को भविष्य के एआई आवश्यकताओं के अनुसार ढांचे विकसित करने की जरूरतों पर बल दिया जाएगा।