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एआई बबल: क्या 1990 के दशक जैसा डॉट-कॉम बबल दोहराने जा रहा है इतिहास? जानिए क्या है आईएमएफ की चेतावनी

Thu, 15 Oct 2026 06:27 AM IST
संकल्प प्रकाश सिंह स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ ने चेतावनी दी है कि अगर एआई से होने वाली कमाई उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी, तो इसका असर वैश्विक शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल सकता है। 

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AI Bubble - फोटो : Amar Ujala AI Generated
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विस्तार
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आज के समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से दुनिया की अर्थव्यवस्था और तकनीकी क्षेत्र को बदल रहा है। बड़ी-बड़ी टेक कंपनियां और निवेशक इस तकनीक को भविष्य की बड़ी ताकत मानते हुए इसमें भारी निवेश कर रही हैं। हालांकि, एआई में लगातार बढ़ता यह निवेश अब एक नए खतरे की ओर भी इशारा कर रहा है, जिसे एआई बबल कहा जा रहा है।

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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एआई से जुड़े सिस्टम बनाने और उन्हें चलाने में कंपनियों को काफी पैसे खर्च करने पड़ते हैं। वहीं इस तकनीक से जुड़े व्यावसायिक मुनाफे और वास्तविक उत्पादकता को लेकर अब भी अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में अगर एआई से जुड़ी कंपनियां निवेशकों की उम्मीदों के मुताबिक कमाई नहीं कर पाती हैं, तो उनके शेयरो की कीमतों में तेज गिरावट आ सकती है। इसका असर केवल टेक कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि दुनियाभर के वित्तीय बाजारों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी बड़े स्तर पर पड़ सकता है।

इसी खतरे को लेकर अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ ने चिंता जताई है। आईएमएफ ने अपनी ग्लोबल फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट जारी की है। इसमें उसने एआई से जुड़े निवेश के जोखिमों को सामने रखा है। रिपोर्ट में आगह किया गया है कि अगर एआई को लेकर बाजार में बनी उम्मीदें पूरी नहीं होती हैं, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
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आईएमएफ ने अपनी रिपोर्ट में एआई सेक्टर में निवेश से जुड़े कई बड़े जोखिमों की ओर ध्यान दिलाया है। रिपोर्ट के मुताबिक एआई कंपनियों के शेयरों की कीमतें काफी बढ़ चुकी हैं। वहीं उनकी कमाई इन ऊंची उम्मीदों को पूरा कर पाएगी या नहीं इसे लेकर अभी भी सवाल है। ऐसे में अगर निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ता है, तो बाजार में अचानक बड़ी गिरावट आ सकती है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि एआई कारोबार में कर्ज लेकर निवेश करने का चलन और कंपनियों के बीच एक-दूसरे को वित्तीय मदद देने की व्यवस्था जोखिम को बढ़ा सकती है। इसे सर्कुलर फाइनेंसिंग कहा जाता है। इस तरह के लेनदेन से कंपनियों की वास्तविक आर्थिक स्थिति का आकलन करना मुश्किल हो सकता है। अगर एआई से होने वाली कमाई उम्मीद से कम रहती है, तो निवेशक तेजी से अपने शेयर बेच सकते हैं। इससे कीमतों में गिरावट और बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। इसका असर व्यापक स्तर पर देखने को मिल सकता है। 

डॉट कॉम बबल

आईएमएफ ने एआई में तेजी से बढ़ते निवेश की तुलना 1990 के दशक के डॉट-कॉम बबल से की है। आपको बता दें कि इंटरनेट के इस शुरुआती दौर में जो कंपनियां इंटरनेट से जुड़ी थीं उनको लेकर निवेशकों में जबरदस्त उत्साह था। उस दौरान कई कंपनियो ने अपनी कमाई के दम पर ऊंची वैल्यूएशन को सही साबित नहीं कर पाई थीं। अब एआई के क्षेत्र में भी कुछ ऐसी ही स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है।

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AI Bubble - फोटो : Amar Ujala AI Generated
रिपोर्ट के मुताबिक कई एआई कंपनियों के शेयरों की कीमत उनकी मौजूदा कमाई और कारोबार के मुकाबले काफी ज्यादा हो गई है। निवेशक इस उम्मीद में बड़ी रकम लगा रहे हैं कि भविष्य में एआई से भारी मुनाफा होगा। वहीं कंपनियां डाटा सेंटर, महंगे कंप्यूटिंग सिस्टम और एडवांस्ड चिप्स पर अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं। हालांकि, इस निवेश से होने वाली वास्तविक कमाई और उत्पादकता में बढ़ोतरी को लेकर अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। आईएमएफ की चेतावनी है कि अगर निवेशकों की उम्मीदें टूटती हैं, तो बड़े पैमाने पर बिकवाली हो सकती है। 

दुनिया की विकास दर हो सकती है धीमी

आईएमएफ की रिपोर्ट के मुताबिक अगर एआई में हो रहा भारी निवेश उम्मीद के अनुसार कमाई और उत्पादकता नहीं बढ़ा पाता है, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुमानों के अनुसार एआई बबल फूटने से वर्ष 2028 तक वैश्विक जीडीपी में 0.4 प्रतिशत से 1.1 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।

इसका मतलब है कि दुनिया की आर्थिक विकास दर को बड़ा झटका लग सकता है। यह नुकसान मुख्य रूप से एआई कंपनियों के शेयरों में गिरावट, कारोबार में निवेश कम होने और कर्ज मिलने में परेशानी बढ़ने से हो सकता है। इससे दुनिया की विकास दर धीमी हो सकती है। 

एआई बबल से पैदा होने वाले वित्तीय खतरे को कम करने के लिए आईएमएफ ने दुनिया भर के नियामकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय बैंकों और जो वित्तीय संस्थान हैं उनको इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि एआई कंपनियां कितना कर्ज ले रही हैं और निवेश के लिए किन तरीकों का इस्तेमाल कर रही हैं। आइएमएफ ने यह भी सुझाव दिया है कि बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों की जोखिम झेलने की क्षमता जांचने के लिए विशेष परीक्षण किए जाएं। इससे पता चल सकेगा कि एआई कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट आने पर वित्तीय संस्थान कितने सुरक्षित रहेंगे।
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