रिपोर्ट के मुताबिक कई एआई कंपनियों के शेयरों की कीमत उनकी मौजूदा कमाई और कारोबार के मुकाबले काफी ज्यादा हो गई है। निवेशक इस उम्मीद में बड़ी रकम लगा रहे हैं कि भविष्य में एआई से भारी मुनाफा होगा। वहीं कंपनियां डाटा सेंटर, महंगे कंप्यूटिंग सिस्टम और एडवांस्ड चिप्स पर अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं। हालांकि, इस निवेश से होने वाली वास्तविक कमाई और उत्पादकता में बढ़ोतरी को लेकर अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। आईएमएफ की चेतावनी है कि अगर निवेशकों की उम्मीदें टूटती हैं, तो बड़े पैमाने पर बिकवाली हो सकती है।
दुनिया की विकास दर हो सकती है धीमी
आईएमएफ की रिपोर्ट के मुताबिक अगर एआई में हो रहा भारी निवेश उम्मीद के अनुसार कमाई और उत्पादकता नहीं बढ़ा पाता है, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुमानों के अनुसार एआई बबल फूटने से वर्ष 2028 तक वैश्विक जीडीपी में 0.4 प्रतिशत से 1.1 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।
इसका मतलब है कि दुनिया की आर्थिक विकास दर को बड़ा झटका लग सकता है। यह नुकसान मुख्य रूप से एआई कंपनियों के शेयरों में गिरावट, कारोबार में निवेश कम होने और कर्ज मिलने में परेशानी बढ़ने से हो सकता है। इससे दुनिया की विकास दर धीमी हो सकती है।
एआई बबल से पैदा होने वाले वित्तीय खतरे को कम करने के लिए आईएमएफ ने दुनिया भर के नियामकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय बैंकों और जो वित्तीय संस्थान हैं उनको इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि एआई कंपनियां कितना कर्ज ले रही हैं और निवेश के लिए किन तरीकों का इस्तेमाल कर रही हैं। आइएमएफ ने यह भी सुझाव दिया है कि बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों की जोखिम झेलने की क्षमता जांचने के लिए विशेष परीक्षण किए जाएं। इससे पता चल सकेगा कि एआई कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट आने पर वित्तीय संस्थान कितने सुरक्षित रहेंगे।