एआई-171 विमान हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों ने रविवार को विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) से ब्लैक बॉक्स का डेटा और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (सीवीआर) की ट्रांसक्रिप्ट सार्वजनिक करने या उनके वकीलों को उपलब्ध कराने की मांग की। परिजनों ने यह सवाल भी उठाया कि एजेंसी इस सामग्री को सार्वजनिक करने से इनकार कर रही है और केवल अंतिम जांच रिपोर्ट जारी करने की बात कह रही है।
12 जून 2025 को अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद लंदन गैटविक जा रहा एअर इंडिया का एआई-171 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इसे पिछले कई दशकों की भारत की सबसे भीषण विमान दुर्घटनाओं में से एक माना जाता है। बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान बीजे मेडिकल कॉलेज के छात्रावास परिसर पर गिरा था। इस हादसे में विमान में सवार 242 में से 241 लोगों और जमीन पर मौजूद 19 लोगों की मौत हुई थी।
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एएआईबी के हलफनामे पर उठाए क्या सवाल?
पीड़ित परिवारों के प्रतिनिधियों ने रविवार को बैठक कर सुप्रीम कोर्ट में एएआईबी की ओर से दाखिल हालिया हलफनामे पर चर्चा की। हलफनामे में एजेंसी ने कहा है कि वह ब्लैक बॉक्स का डेटा और सीवीआर ट्रांसक्रिप्ट सार्वजनिक नहीं करेगी। बैठक में जांच प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता, दुर्घटनास्थल पर स्मारक बनाने और जांच में सिम्युलेटर परीक्षण की भूमिका जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए हादसे में अपने भाई, भतीजी और बुआ को खोने वाले रोमिन वोहरा ने सवाल उठाया कि अगर अधिकारी कॉकपिट की बातचीत सार्वजनिक नहीं करना चाहते थे, तो दुर्घटना के कुछ ही दिनों बाद उसका एक हिस्सा कैसे सामने आया। उन्होंने कहा, "अगर उनका कभी डाटा जारी करने का इरादा नहीं था, तो उन्होंने दुर्घटना के कुछ ही दिनों बाद कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग ट्रांसक्रिप्ट (प्रारंभिक रिपोर्ट के हिस्से के रूप में) क्यों जारी की?"
क्या पायलटों पर दोष मढ़ने की हो रही कोशिश?
उन्होंने दावा किया कि परिवार जानना चाहते थे कि क्या यह चयनात्मक प्रकटीकरण "पायलटों पर दोष मढ़ने या पीड़ितों के परिवारों को गुमराह करने" के लिए था।" उन्होंने कहा कि परिवार चाहते हैं कि ब्लैक बॉक्स का मूल डाटा या तो सार्वजनिक किया जाए, या फिर पीड़ित परिवारों अथवा उनके वकीलों को उपलब्ध कराया जाए।
वोहरा ने कहा, "अगर हमें केवल सारांश रिपोर्ट दी जाएगी, तो इसकी सटीकता की क्या गारंटी है? जब तक वास्तविक ब्लैक बॉक्स डाटा जारी नहीं किया जाता, तब तक कोई भी यह निश्चित रूप से नहीं कह सकता कि रिपोर्ट सही है या गलत।" खेड़ा जिले के रहने वाले वोहरा ने बताया कि परिवारों ने अभी तक कोई कानूनी कार्रवाई शुरू नहीं की है। वे अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, जबकि उनके वकील ब्लैक बॉक्स डाटा हासिल करने के लिए सभी कानूनी विकल्पों पर काम कर रहे हैं।
पीड़ित परिवारों ने रविवार को दुर्घटनास्थल पर स्थायी स्मारक बनाने की अपनी मांग भी दोहराई। वोहरा ने सरकार, एयर इंडिया और एयरलाइन की मालिक टाटा समूह से स्मारक के लिए जमीन चिन्हित करने और धन उपलब्ध कराने की अपील की।
सुप्रीम कोर्ट में क्या बोला एएआईबी?
उन्होंने कहा कि परिवार ब्लैक बॉक्स डाटा हासिल करने की कोशिश जारी रखेंगे। उनका कहना था कि पहले की कई विमान दुर्घटनाओं की जांच में ऐसी जानकारी सार्वजनिक की गई है, इसलिए इस मामले में इसे गोपनीय रखने का स्पष्ट कारण समझ नहीं आता। उन्होंने यह भी कहा कि अगर एएआईबी के हलफनामे में बताए गए समय तक अंतिम रिपोर्ट जारी नहीं होती है, तो परिवार प्रशासन से अनुमति लेकर विरोध प्रदर्शन करने पर विचार करेंगे।
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इस सप्ताह एएआईबी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि विमान दुर्घटना की जांच की अंतिम रिपोर्ट का मसौदा इस वर्ष अक्टूबर तक तैयार होने की उम्मीद है। एजेंसी ने अपने हलफनामे में कहा कि गवाहों के बयान, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर की रिकॉर्डिंग और ट्रांसक्रिप्ट, एयर ट्रैफिक कंट्रोल से हुई बातचीत तथा चिकित्सकीय जानकारी जैसी संवेदनशील जांच सामग्री को गोपनीय रखना जरूरी है। इनके सार्वजनिक होने से जारी जांच और भविष्य की विमान दुर्घटना जांच की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।