थल सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने शनिवार को अहमदाबाद डिजाइन वीक 3.0 में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि, चेन्नई और लखनऊ डिफेंस कॉरिडोर ने पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को बदलकर रख दिया है। जहां तक सेना का सवाल है, तो अब हम जो कुछ भी खरीदते हैं उसका 85 प्रतिशत हिस्सा भारतीय कंपनियों से है।
सेना प्रमुख ने कहा कि, किसी समस्या के बारे में बात करते समय 4 'डी' को ध्यान में रखने की जरूरत है। ये चार डी हैं- डिस्कवर, डिफाइन, डेवेलप और डिलीवर। गांधी नगर में हो रहा यह तीन दिवसीय कार्यक्रम "डिजाइन एंड इनोवेशन इन डिफेंस एंड एयरोस्पेस" विषय पर आधारित है। इसमें कई रक्षा विशेषज्ञों के शामिल होने की संभावना है।
थल सेना प्रमुख ने कहा कि रक्षा और वायु क्षेत्र का भविष्य इलेक्ट्रिक और लघुकरण है। उन्होंने कहा कि जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए विद्युत आधारित उपकरणों के इस्तेमाल की जरूरत है। कर्णावती यूनिवर्सिटी (अहमदाबाद) में आयोजित तीन दिवसीय डिजाइन सप्ताह के उद्घाटन समारोह में जनरल नरवणे ने इलेक्ट्रिॉनिक वस्तुओं के महत्व पर जोर देते हुए कहा, हमें जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करनी होगी साथ ही जहाजों और विमानों के आकार को छोटा करने की जरूरत है। छोटी जगहों में ज्यादा सुविधाएं देकर हम इनका भरपूर इस्तेमाल कर सकते हैं।
थल सेना प्रमुख ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के अलावा, जिसके लिए केंद्र ने एक स्पष्ट रोडमैप बनाया है। उसमें ‘इलेक्ट्रिक-आधारित चीजों’ को इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया है ताकि हम जीवाश्म ईंधन पर अपनी निर्भरता को एक बड़े स्तर तक कम कर सकें।
सीमाई इलाकों में एक यूनिट बिजली की लागत 15 फीसदी तक अधिक
जनरल ने कहा, सीमाई इलाकों में बिजली की सुविधा नहीं होने के कारण हजारों की तादाद में जनरेटर रखे गए हैं, जो ईंधन जैसे डीजल या पैट्रोल से चलते हैं। ईंधन को उन इलाकों तक पहुंचाने के लिए परिवहन की जरूरत पड़ती है। जिसमें अलग से और अधिक खर्च आते हैं। सीमावर्ती इलाकों में एक यूनिट बिजली पैदा करने की लागत, सामान्य से 15 फीसदी तक अधिक है। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि हमें उन सभी इलाके के लिए विकल्प तलाशने की जरूरत है, जहां बिजली उत्पादन की समस्या है ताकि हम जीवाश्म ईंधन पर अपनी निर्भरता को कम कर सकें।
आर्मी डिजाइन ब्यूरो सुविधा प्रदाता की भूमिका निभाएगा
सेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय सेना ने एक आर्मी डिजाइन ब्यूरो स्थापित किया है जो डिजाइनर और सेना के बीच सुविधा प्रदाता की भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि सेना को ऐसे डिजाइन की जरूरत है जिससे अगले पचास तक उसके उपकरण प्रभावी बने रहें।