इस मुलाकात पर तृणमूल कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि न तो सीपीआई(एम) और न ही नई बनी पार्टी को जनता का समर्थन हासिल है। उन्होंने आरोप लगाया कि 34 साल तक बंगाल पर शासन करने वाली सीपीआई(एम) अब राजनीतिक रूप से दिवालिया हो चुकी है और चुनाव से पहले गठबंधन के लिए हाथ फैलाने को मजबूर है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है। इसी कड़ी में सीपीआई(एम) की पश्चिम बंगाल इकाई के सचिव मोहम्मद सलीम ने नवगठित जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर से मुलाकात की। इस बैठक के बाद दोनों दलों के बीच संभावित गठबंधन को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं।
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न्यू टाउन के एक होटल में हुई करीब एक घंटे की इस बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे समेत कई मुद्दों पर बातचीत हुई। सलीम ने कहा कि हुमायूं कबीर की ओर से रखे गए प्रस्ताव पर पहले वाम मोर्चा के भीतर चर्चा की जाएगी। इसके बाद मोर्चे के बाहर के वामपंथी दलों और फिर इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) से बातचीत होगी।
पिछले चुनाव में नहीं खुला था वाम दलों का खाता
सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाले वाम मोर्चा ने 2021 का विधानसभा चुनाव आईएसएफ के साथ मिलकर लड़ा था, लेकिन खाता भी नहीं खोल सका था। उस चुनाव में भाजपा के अलावा आईएसएफ के नेता नौशाद सिद्दीकी ही एकमात्र विपक्षी विधायक बने थे।
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सलीम ने स्पष्ट किया कि इस बैठक का मकसद किसी गठबंधन पर अंतिम सहमति बनाना नहीं, बल्कि हुमायूं कबीर की मंशा और उनके राजनीतिक उद्देश्य को समझना था। उन्होंने कहा कि कई दल अभी तक सीटों के बंटवारे पर कोई अंतिम फैसला नहीं कर पाए हैं।
चुनाव से पहले मुलाकात पर क्या बोले हुमायूं कबीर?
वहीं, हुमायूं कबीर ने इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया, लेकिन यह भी स्वीकार किया कि चुनावी गठबंधन की संभावनाओं पर चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि उन्होंने सलीम से अनुरोध किया है कि गठबंधन की प्रक्रिया 15 फरवरी तक पूरी कर ली जाए। कबीर ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी आईएसएफ नेतृत्व से बातचीत चाहती है और एआईएमआईएम से भी गठबंधन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।