2019 लोकसभा चुनाव होने में अब कुछ ही महीनों का समय बचा है। इसलिए सभी पार्टियों ने जीत के लिए कमर कसनी शुरू कर दी है। ऐसे में केंद्र सरकार ने भी किसानों के लिए एक विशेष योजना बनाई है। सरकार एक ऐसे प्लान पर काम कर रही है जिससे किसानों को तुरंत राहत मिल सके। इसके लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजना पर विचार किया जा रहा है। यह योजना तेलंगाना में पहले से ही लागू है।
कई दौर की बातचीत के बात यह नतीजा निकला कि छोटे और मध्यमवर्गीय किसानों के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को अपनाया जाए ताकि वह बीज, खाद, कीटनाशक और मजदूरी की जरूरतों को पूरी कर सकें। सूत्रों का कहना है कि इस परियोजना की लागत लगभग 1.25 लाख करोड़ आएगी और इसका भार केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वहन करेंगे।
बैठक में हिस्सा लेने वाले कुछ लोगों ने 70:30 का सुझाव दिया है। यानी 70 प्रतिशत भार केंद्र और 30 प्रतिशत राज्य वहन करेंगे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'यह एक राजनीतिक निर्णय है। लोकसभा चुनाव से पहले इस योजना को लागू करना एक चुनौती होगी। लेकिन ज्यादातर राज्यों में भाजपा की सरकार है जिसके कारण मदद मिलेगी। यहां तक कि कांग्रेस शासित राज्य भी इसमें मदद करेंगे क्योंकि सभी का उद्देश्य किसानों के गुस्से को शांत करना है।'
दूसरे विकल्प जिसपर बातचीत हुई वह है मूल्य में कमी का भुगतान जिसका सुझाव नीति आयोग ने मध्यम अवधि की रणनीति के तहत दिया है। इस प्लान के अंतर्गत यदि कीमत न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे होती है तो किसानों को सब्सिडी दी जाएगी। नीति आयोग के प्रस्ताव के अनुसार हर किसान को अपनी फसल और बुवाई को पास के एपीएमसी मंडी में पंजीकृत करवाना होगा।
यदि बाजार का भाव न्यूनतम मूल्य से कम होता है तो किसान को अंतर की कम से कम 10 प्रतिशत राशि दी जाएगी जिसे कि आधार लिंक बैंक अकाउंट में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण में जमा करवाया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, वित्त मंत्री अरुण जेटली और कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह के साथ किसानों की समस्याओं को लेकर बातचीत की है। जिससे यह उम्मीद है कि सरकार जल्द ही किसानों की समस्या को दूर करने के लिए बड़ी योजना की घोषणा करेगी।