अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, वीएस सैनी पर पर 2010 में हुए फील्ड मूल्यांकन ट्रायल के दौरान कथित बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल जेम्स से कंपनी के पक्ष में रिश्वत मांगने का आरोप है।
बहुचर्चित अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में रिश्वतखोरी के आरोपों का सामना कर रहे आर्मी एविएशन के रिटायर्ड ब्रिगेडियर वीएस सैनी को बड़ी राहत मिली है। रिश्वतखोरी के आरोपों का समर्थन करने वाले कोई सबूत नहीं मिलने के बाद सीबीआई ने उनके खिलाफ अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर भ्रष्टाचार मामले को लेकर दर्ज मुकदमें को बंद कर दिया।
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आर्मी एविएशन के ब्रिगेडियर वीएस सैनी (सेवानिवृत्त) पर 2010 में लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टरों के फील्ड ट्रायल के दौरान यूके स्थित कंपनी का कथित रूप से पक्ष लेने के लिए मामला दर्ज किया गया था। अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, वीएस सैनी पर पर 2010 में हुए फील्ड मूल्यांकन ट्रायल के दौरान कथित बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल जेम्स से कंपनी के पक्ष में रिश्वत मांगने का आरोप है।
वहीं, मामले में राहत मिलने के बाद जब वायुसेना के रिटायर अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने कोई भी प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि वे अपने आस-पास सिर्फ सकारात्मक माहौल चाहते हैं। अधिकारियों ने बताया कि यह मामला दशकों पुराने चेतक और चीता हेलीकॉप्टरों के बेड़े को बदलने के लिए टोही और निगरानी अभियानों के लिए आर्मी एविएशन द्वारा 197 लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टरों की आवश्यकता से संबंधित है।
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आर्मी एविएशन ने 24 जुलाई, 2008 को प्रस्ताव के लिए अनुरोध (आरएफपी) जारी किया था, जिसके लिए तीन कंपनियों - यूके स्थित अगस्ता वेस्टलैंड, फ्रांस स्थित यूरोकॉप्टर और रूस स्थित रोसोबोरोनोएक्सपोर्ट्स ने अपनी रुचि दिखाई थी। मामले में वीएस सैनी पर यह आरोप लगाया गया था कि ब्रिगेडियर सैनी ने ट्रायल टीम के प्रभारी अधिकारी के रूप में अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर की एक अलग किस्म की भागीदारी की अनुमति दी थी। इतना ही नहीं उन्होंने 3 फरवरी, 2010 को अगस्ता वेस्टलैंड के पक्ष में हथियार उपकरण (डब्ल्यूई) निदेशालय को एक पत्र भी लिखा था। इसमें उन्होंने लिखा था कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है जिससे अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर के मूल्यांकन में देरी हो सकती है।
अधिकारियों ने कहा कि डब्ल्यूई निदेशालय से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर, पूरी परीक्षण टीम ने सर्वसम्मति से परीक्षण के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया था। यह ब्रिगेडियर सैनी का स्वतंत्र निर्णय नहीं था।