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Agriculture: डिजिटल और हाईटेक खेती से UP बन रहा देश का फूड हब, जानें कैसे ड्रोन-एआई ने की किसानों की मदद?

Thu, 12 Feb 2026 10:21 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हाल ही में यूपी सरकार की ओर से पेश बजट में कृषि और पशुपालन के लिए 10,888 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह पिछले साल की तुलना में करीब 20 फीसदी ज्यादा है।
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खेती किसानी - फोटो : एआई
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश अब खेती किसानी के दम पर देश में नई पहचान बना रहा है। गेहूं, गन्ना, दूध और आंवला उत्पादन में प्रदेश पहले स्थान पर है। वहीं धान, केला, आम, अमरूद जैसे कृषि उत्पादों में भी यूपी का योगदान राष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा माना जा रहा है। सरकार का कहना है, यह बदलाव सिर्फ भौगोलिक अनुकूलता का नतीजा नहीं है, बल्कि बीते कुछ वर्षों में लागू की गई ठोस नीतियों, प्रशासनिक सुधारों और वित्तीय अनुशासन का असर है।

2016-17 में कृषि विकास दर 8.6 फीसदी थी, जो 2024-25 में बढ़कर 17.7 फीसदी तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। खास बात यह है कि देश की कुल कृषि योग्य भूमि में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 11 फीसदी है, लेकिन राष्ट्रीय खाद्यान्न उत्पादन में प्रदेश 20 फीसदी से ज्यादा योगदान दे रहा है। इसे यूपी की खेती में बढ़ती उत्पादकता और मजबूत सप्लाई चेन का संकेत माना जा रहा है।

हाल ही में पेश 9,12,696 करोड़ रुपये के बजट में कृषि और पशुपालन के लिए 10,888 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह पिछले साल की तुलना में करीब 20 फीसदी ज्यादा है। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक का कहना है कि, यह बढ़ा हुआ आवंटन बिना नए कर लगाए, राजस्व संग्रह बढ़ाकर और गैर-जरूरी खर्चों पर रोक लगाकर जुटाया गया है। इसके जरिए विकास को जन भार नहीं, बल्कि जन-सहभागिता के मॉडल के तौर पर आगे बढ़ाने की कोशिश की गई है।

मलिक ने कहा, 2017 में सत्ता संभालते ही सरकार ने लघु और सीमांत किसानों का 36,000 करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया। जिससे लाखों किसानों को राहत मिली। पीएम किसान सम्मान निधि के क्रियान्वयन में भी यूपी आगे रहा है। करीब 3.12 करोड़ किसानों को डीबीटी के जरिए सीधे लाभ पहुंचाया गया है। बाणसागर, सरयू नहर, मध्य गंगा नहर और अर्जुन सहायक जैसी परियोजनाएं पूरी होने से लाखों हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि की सिंचाई संभव हुई। निजी नलकूपों को मुफ्त बिजली मिलने से किसानों की लागत भी घटी है। पिछले 9 वर्षों में गन्ना किसानों को 3.04 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान किया गया है, जिससे भुगतान व्यवस्था ज्यादा पारदर्शी और समयबद्ध हुई। वहीं, एथेनॉल उत्पादन में बढ़त से चीनी मिलों की स्थिति सुधरी और किसानों के भुगतान चक्र में भी स्थिरता आई।

उन्होंने कहा , आँवला, केला, काला नमक चावल और गुड़ को ब्रांडिंग और बेहतर बाज़ार सुविधा मिली है। कॄषि निर्यात केंद्रों से फल, सब्ज़ियाँ और दुग्ध उत्पाद विदेश तक पहुंच रहे हैं। नंद बाबा दुग्ध मिशन से दुग्ध क्षेत्र संगठित हुआ और कृत्रिम गर्भाधान 80 फीसदी गाँवों तक पहुंचा, जिससे उत्पादन 239 लाख टन तक बढ़ा है। उत्तर प्रदेश अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर तकनीक सक्षम कृषि की ओर बढ़ रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म से त्वरित ऋण, ड्रोन छिड़काव, एआई फसल निगरानी, सीड पार्क इसके संकेत हैं। मुख्यमंत्री का ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था लक्ष्य कृषि पर आधारित है। अगर यह मॉडल स्थिर और पारदर्शी तरीके से चले तो यूपी न केवल देश की खाद्य सुरक्षा का आधार बनेगा, बल्कि वैश्विक खाद्य शृंखला में भी अपनी ताकत दिखा सकेगा।

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