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कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किया खुलासा, कानूनों को वापस क्यों नहीं ले रही सरकार

Thu, 25 Feb 2021 07:02 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पूसा किसान मेले में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने नए कृषि कानूनों को किसानों के विकास, पलायन रोकने और आत्मनिर्भर भारत के लिए आवश्यक बताया...
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Agriculture Minister at Pusa kisan mela - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने नए कृषि कानूनों को किसानों के लिए बेहद आवश्यक बताया है। उन्होंने कहा कि आजादी के समय देश की जीडीपी में कृषि का हिस्सा लगभग आधा हुआ करता था जो अब बहुत कम हो गया है, जबकि दूसरे क्षेत्र कृषि से बहुत आगे निकल गए। इसका सबसे बड़ा कारण रहा कि दूसरे क्षेत्रों में समय-समय पर बदलाव किए गए, उनके लिए नए-नए कानून बनाए गए और उनके लिए निजी पूंजी का रास्ता साफ किया गया।

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लेकिन कृषि में समय के साथ कोई बदलाव नहीं किया गया, जिसके कारण यह दूसरे क्षेत्रों से पिछड़ गया। उन्होंने उलटे किसानों से ही पूछ डाला कि अगर सरकार किसानों की स्थिति बदलने की कोशिश कर रही है तो क्या ऐसी स्थिति में इस तरह के किसान आंदोलन होने चाहिए?

गुरुवार को पूसा किसान मेले में किसानों को संबोधित करते हुए नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि आज देश के 86 फीसदी किसानों के पास दो हेक्टेयर से भी कम भूमि है। इनमें कोई बड़ा निवेश नहीं हो पाता। इससे इन किसानों को कोई फायदा नहीं पहुंचता है। लिहाजा उनकी खेती कर्ज में डूबती जाती है और घाटे का सौदा बनी रहती है। इस स्थिति से निराश किसानों के बेटे खेती छोड़ रहे हैं और शहरों में जाकर नौकरी की तलाश कर रहे हैं। लेकिन अगर उनकी खेती को ही लाभ का सौदा बना दिया जाता, तो यह पलायन रुक सकता है। नए कृषि कानूनों के सहारे सरकार यही करने की कोशिश कर रही है।
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कृषि मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ऐसा मॉडल खड़ा करना चाहती है, जहां किसान अपनी मर्जी से अपनी फसल कहीं भी बेच सकें, मंडी के अंदर या बाहर अपनी सुविधा के अनुसार फसलों की कीमत प्राप्त कर सकें। इसमें कहीं भी भूमि का समझौता नहीं किया जा सकता। लेकिन इसके बाद भी किसानों को भड़काने की कोशिश की जा रही है।

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Flowers variety at Pusa Kisan Mela - फोटो : Amar Ujala

किसानों ने कहा- कानून सही, राजनीति गलत

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के भाषण के बाद जब कृषि कानूनों के बारे में किसानों से पूछा गया तो उन्होंने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी। हरियाणा से आए किसान प्रदीप सिंह बैंतवार ने कहा कि कृषि मंत्री ने अपने पूरे भाषण में एक बार भी न्यूनतम समर्थन मूल्य का जिक्र नहीं किया जो किसानों की सबसे बड़ी मांग थी। प्रधानमंत्री सहित कृषि मंत्री भी बार-बार यह कह रहे हैं कि न्यूनतम समर्थन मूल्य खत्म नहीं किया जाएगा। ऐसे में इसे कानून में लिखित तौर पर देने में क्या परेशानी है?

बिजनौर के किसान कमला प्रसाद साहू ने कहा कि कृषि मंत्री ने कहा कि अपने भाषण में यही साबित करने की कोशिश की है कि कृषि इसलिए पिछड़ा रह गया क्योंकि इसमें निजी क्षेत्रों की भागीदारी नहीं बढ़ाई गई। लेकिन अब जब किसान निजी क्षेत्रों को भी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद करने के लिए बाध्यकारी कानून बनाने की बात करते हैं तो कृषि मंत्री को एतराज क्यों है। सरकार को बताना चाहिए कि वह किसानों की फसलों का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए कौन सा मॉडल खड़ा करना चाहती है।

वहीं मेरठ के किसान सुधाकर त्यागी ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की स्थिति बदलने के लिए लगातार मेहनत कर रही है। कृषि बजट को तीन गुने से ज्यादा बढ़ाना, किसानों को नकदी सहायता देना इसके प्रमाण हैं, किसी सरकार ने आज तक ये काम नहीं किया था। उन्होंने कहा कि आज किसान मूर्ख नहीं हैं, वे देख रहे हैं कि किसान आंदोलन के नाम पर राजनीति करने की कोशिश की जा रही है। इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। चूंकि सरकार किसानों की कई मांगों को मान चुकी है, किसानों को भी आंदोलन खत्म कर देना चाहिए। 
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