Flowers variety at Pusa Kisan Mela
- फोटो : Amar Ujala
किसानों ने कहा- कानून सही, राजनीति गलत
कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के भाषण के बाद जब कृषि कानूनों के बारे में किसानों से पूछा गया तो उन्होंने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी। हरियाणा से आए किसान प्रदीप सिंह बैंतवार ने कहा कि कृषि मंत्री ने अपने पूरे भाषण में एक बार भी न्यूनतम समर्थन मूल्य का जिक्र नहीं किया जो किसानों की सबसे बड़ी मांग थी। प्रधानमंत्री सहित कृषि मंत्री भी बार-बार यह कह रहे हैं कि न्यूनतम समर्थन मूल्य खत्म नहीं किया जाएगा। ऐसे में इसे कानून में लिखित तौर पर देने में क्या परेशानी है?
बिजनौर के किसान कमला प्रसाद साहू ने कहा कि कृषि मंत्री ने कहा कि अपने भाषण में यही साबित करने की कोशिश की है कि कृषि इसलिए पिछड़ा रह गया क्योंकि इसमें निजी क्षेत्रों की भागीदारी नहीं बढ़ाई गई। लेकिन अब जब किसान निजी क्षेत्रों को भी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद करने के लिए बाध्यकारी कानून बनाने की बात करते हैं तो कृषि मंत्री को एतराज क्यों है। सरकार को बताना चाहिए कि वह किसानों की फसलों का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए कौन सा मॉडल खड़ा करना चाहती है।
वहीं मेरठ के किसान सुधाकर त्यागी ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की स्थिति बदलने के लिए लगातार मेहनत कर रही है। कृषि बजट को तीन गुने से ज्यादा बढ़ाना, किसानों को नकदी सहायता देना इसके प्रमाण हैं, किसी सरकार ने आज तक ये काम नहीं किया था। उन्होंने कहा कि आज किसान मूर्ख नहीं हैं, वे देख रहे हैं कि किसान आंदोलन के नाम पर राजनीति करने की कोशिश की जा रही है। इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। चूंकि सरकार किसानों की कई मांगों को मान चुकी है, किसानों को भी आंदोलन खत्म कर देना चाहिए।