देश में चल रहे कृषि आंदोलन के बीच पेश किए गए आम बजट 2021-22 से उम्मीदें की जा रही थी कि किसानों का गुस्सा शांत करने के लिए कोई बड़ी घोषणा हो सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। किसानों को की आय बढ़ाने के लिए फसल कटाई के बाद स्टोरेज और प्रसंस्करण के लिए बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए 2.5 से 100 प्रतिशत तक कृषि आधारभूत ढांचा विकास के प्रस्ताव के साथ ही किसानों को आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई गई है।
पेट्रोल-डीजल समेत कुछ उत्पादों पर लगेगा शेष एफपीओ को बढ़ावा देने के लिए भी उठाए कदम
कृषि बुनियादी ढांचे को विकसित करके ही कृषि उपज को संरक्षित और प्रसंस्कृत करके अधिक उत्पादन से किसानों की आमदनी बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। सुविधाओं को बढ़ाने के उद्देश्य से कृषि आधारभूत ढांचा को से एपीएमसी मंडियों के विकास की बात कही गई है। वर्ष 2020-2021 में कृषि क्षेत्र के लिए जारी 1.45 लाख करोड़ की तुलना में वर्ष 2021-2022 में 1.48 करोड़ रुपये प्रस्तावित किया गया है।
कृषि उत्पादों के निर्यात में सबसे अधिक समुद्री उत्पादों का रहता है। इसमें संभावनाओं को देखते हुए इसे बढ़ावा दिया गया है। मछली पकड़ने के बंदरगाह, फिश लैंडिंग, केंद्र और समुद्री शैवाल, समुद्री वनस्पति की खेती को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त निवेश का प्रस्ताव दिया गया है।
कृषि ऋण को पिछले साल की अपेक्षा 10 प्रतिशत तक बढ़ाने के साथ ही पशुपालन डेयरी और मत्स्य पालन के लिए लोन बढ़ाने की ओर ध्यान दिया गया है। छोटे किसानों को आय बढ़ाने के लिए कृषि उत्पादन संगठनों (एफपीओ) को बढ़ावा दिया जाएगा इससे छोटे किसान एफपीओ बनाकर खेती करें और उन्हें उत्पादों को भेजने में दिक्कत ना आए।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कॉटन 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगने लगाने की घोषणा की है। अभी तक कॉटन के आयात पर कोई शुल्क नहीं लगता था। इससे घरेलू बाजार में कॉटन के मूल्य बढ़ेंगे जिससे कॉटन किसानों का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।