सुप्रीम कोर्ट ने आईआईटी बॉम्बे को गलत लिंक पर क्लिक करने की वजह से बीटेक में दाखिले से महरूम हुए आगरा निवासी 18 वर्षीय छात्र सिद्धांत बत्रा को अंतरिम तौर पर दाखिला देने का निर्देश दिया है। दरअसल, उस गलत लिंक पर क्लिक करने का मतलब था कि छात्र दाखिले की प्रक्रिया से अलग होना चाहता है।
जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने छात्र सिद्धांत की ओर से पेश वकील की दलीलों को सुनने के बाद आईआईटी बॉम्बे से उसे अस्थायी तौर पर दाखिला देने के लिए कहा है। साथ ही छात्र की याचिका पर आईआईटी बॉम्बे को नोटिस भी जारी किया है। अगली सुनवाई जनवरी में होगी। सिद्धांत ने पहले बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था लेकिन वहां से उसे राहत नहीं मिल थी।
इसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। अपनी याचिका में उसने गुहार लगाई थी कि आईआईटी बॉम्बे को दाखिला लेने का निर्देश दिया जाए। जेईई एडवांस परीक्षा में 270वीं रैंक हासिल करने वाले सिद्धांत ने मानवीय आधार पर दाखिला देने की अपील की थी।
याचिका में उसने कहा है कि आईआईटी बॉम्बे को एक अतिरिक्त सीट की व्यवस्था करने का निर्देश दिया जाना चाहिए। उसने यह भी कहा कि मां-बाप की मृत्यु के बाद वह अपने नाना-नानी के पास रहता है और उसने बहुत कठिन हालातों में परीक्षा में सफलता हासिल की है। जब वह छोटा ही था तब उसके पिता की मृत्यु हो गई थी।
उसके बाद मां ने उसका पालन पोषण किया। वर्ष 2018 में मां भी गुजर गई। उसके बाद नाना नानी उसकी देखभाल कर रहे हैं। उसके मुताबिक, 31 अक्तूबर को जब वह ऑनलाइन दाखिले की प्रक्रिया कर रहा था। उसी दौरान अनजाने में उससे गलत लिंक दब गया। उस लिंक को दबाने का मतलब था कि वह दाखिला नहीं लेना चाहता है।
इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने उसकी याचिका पर गौर करने के बाद आईआईटी को सिद्धांत के प्रतिवेदन पर विचार कर उचित आदेश पारित करने के लिए कहा था। आईआईटी बॉम्बे का कहना था कि उसकी सीटें भर चुकी हैं और वह नियम से बंधा हुआ है। आईआईटी का यह भी कहना था कि यह प्रक्रिया दो चरण की थी, ऐसे में यह कहना कि अनजाने में लिंक क्लिक हो गया, सही नहीं लगता।