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केंद्रशासित प्रदेश बनने के बाद लद्दाख में जश्न के बीच उठी विधानमंडल के दर्जे की मांग

Wed, 14 Aug 2019 09:22 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
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फाइल फोटो - फोटो : ट्विटर
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आज पूरे लद्दाख में जश्न का माहौल है क्योंकि सरकार ने उनकी छह-सात दशक पुरानी मांग जो पूरी कर दी है। बरसों से स्थानीय लोगों की मांग थी उन्हें कश्मीर से अलग कर दिया जाए। वहीं लद्दाख के केंद्रशासित प्रदेश बन जाने के बाद उनकी यह मांग तो पूरी हो गई है, लेकिन अब उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि वहां के विकास के लिए उन्हें विधानमंडल की व्यवस्था दी जाए।

सरकारी नौकरियां मिलने की उम्मीद

लद्दाख में चीन की सीमा के साथ सटे न्योमा के पार्षद थुपस्तान वांगचुक का कहना है कि हमारा मकसद तो पूरा हो गया है, जिसके लिए हमें दशकों तक इंतजार करना पड़ा। इस मांग के लिए लद्दाख के लोगों ने अपनी जानें तक दी हैं। लद्दाखियों को मकसद था कि लद्दाख को कश्मीर से अलग किया जाए, क्योंकि विकास का पैसा या रोजगार में कश्मीर बीच का रोड़ा था। उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि अब यहां के लोगों को सरकारी नौकरियां भी मिलेंगी और विकास की रफ़्तार बढ़ जाएगी।

कश्मीर से मिली मुक्ति

वांगचुक ने बताया कि यहां की एक प्रमुख मांग यह भी है कि लद्दाख को अपना विधानमंडल दिया जाए। हमारे भी विधायक हों, मंत्री हों। वहीं कुंगयम के पार्षद दोर्जे मोटुप कहते हैं कि जब इतना हो गया तो, आगे भी सब ठीक होगा। यहां के लोग चाहते थे कि उन्हें कश्मीर से मुक्ति मिल जाए। वह मिल भी गई, और इससे लद्दाख का विकास तेज गति से हो सकेगा।

यहां की जैविक परिस्थितियां बाकी जगहों से भिन्न

साक्ती से पार्षद ग्याल पी. वांग्याल बताते हैं कि कश्मीर से अलग होने के लिए लद्दाखियों ने संघर्ष करते हुए, बलिदान भी दिया है। वह कहते हैं कि अगर कोई विकास कार्य अंतिम चरण में है, लेकिन कश्मीर से फंड जारी न होने के चलते वह सालों तक अटका रहता था। लेकिन अब किसी की मंजूरी का इंतजार नहीं करना होगा। यहां की जैविक परिस्थितयां बाकी जगहों से भिन्न हैं।

जनसंख्या कम, इलाका बड़ा

मोनैस्ट्री और लदाख के मूनलैंड नाम से प्रसिद्ध लामायुरू से पार्षद मोरुप दोर्जे कहते हैं कि लद्दाख के लोगों को चंडीगढ़ जैसे केंद्र शासित प्रदेश की जगह विधानमंडल का दर्जा देने की मंजूरी चाहिए थी। वह कहते हैं कि भले ही जनसंख्या घनत्व के मामले में लद्दाख कम है, लेकिन इसका क्षेत्र बहुत विशाल है। वह बताते हैं कि उनके लामायुरू इलाके में ही मात्र दस गांव हैं, जिनका दौरा करने में पांच से छह दिन लग जाते हैं और तकरीबन 500-600 किमी की दूरी तय करना पड़ेगी।

पालमपुर से लेह के बीच चलेगी रेल

सास पोल से पार्षद शेरिंग वांगडू का कहना है कि जल्द ही पालमपुर से लेह के बीच रेल की सीटी सुनाई देगी। जिसका सर्वे भी किया जा चुका है और जल्द ही फंड भी रिलीज होगा। वहीं केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद मनाली-लेह मार्ग भी सुरक्षित होगा। अभी तक लद्दाख में बाहर के लोग सरकारी नौकरी में आते रहे हैं, लेकिन यहां आते ही उन्हें ट्रांसफर कराने की जल्दी रहती है। लेकिन अब लद्दाख के लोगों को सरकारी नौकरियां मिलेंगी तो वे यहीं पर रहेंगे। वह बताते हैं कि यहां के लोग धीरे-धीरे समझ रहे हैं कि केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी।

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