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Maharashtra: बाबा सिद्दीकी की हत्या के बाद बांद्रा पूर्व सीट पर बदले समीकरण, त्रिकोणीय मुकाबले में दिखेगा असर

Thu, 31 Oct 2024 10:58 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

बांद्रा रेलवे स्टेशन के पूर्वी हिस्से में स्थित बांद्रा पूर्व को 2009 में एक अलग निर्वाचन क्षेत्र के रूप में बनाया गया था। पहले इसे कांग्रेस के गढ़ खेरवाड़ी के नाम से जाना जाता था।
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बाबा सिद्दीकी, जीशान सिद्दीकी। - फोटो : X/BabaSiddique
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विस्तार
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एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या के बाद बांद्रा पूर्व सीट पर समीकरण बदल गए हैं। कभी शिवसेना का गढ़ रही इस सीट पर इस बार त्रिकोणीय मुकाबला है। इसके बाद यहां चुनाव परिणाम को लेकर कयास लगने लगे हैं। 

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कांग्रेस नेता और बाबा सिद्दीकी के बेटे जीशान सिद्दीकी 2019 में यहां से शिवसेना के पूर्व महापौर विश्वनाथ महादेश्वर को हराकर विधायक बने थे। ऐसा बताया जा रहा है कि अपने पिता, राकांपा नेता और पूर्व कांग्रेस मंत्री बाबा सिद्दीकी की हत्या के बाद जीशान को इस चुनाव में बढ़त मिल सकती है। जीशान को एनसीपी अजित से प्रत्याशी बनाया गया है। 

लोगों का कहना है कि भाजपा की सहयोगी अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में शामिल होने का उनका फैसला जीशान के खिलाफ जा सकता है, क्योंकि इस निर्वाचन क्षेत्र में बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी है। जबकि अजित पवार के नेतृत्व वाली राकांपा सत्तारूढ़ भाजपा-शिवसेना-राकांपा महायुति गठबंधन का हिस्सा है।
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इस सीट पर राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने पूर्व शिवसेना विधायक तृप्ति सावंत को मैदान में उतारा है। जबकि शिव सेना (उद्धव) ने पार्टी नेता आदित्य ठाकरे के चचेरे भाई और पार्टी की युवा शाखा युवा सेना के सचिव वरुण सरदेसाई को मैदान में उतारा है।

मातोश्री भी बांद्रा पूर्व निर्वाचन क्षेत्र में
बांद्रा पूर्व सीट उद्धव ठाकरे के लिए भी प्रतिष्ठा का सवाल है। क्योंकि ठाकरे परिवार का निवास मातोश्री भी यहां है। इस क्षेत्र में मलिन बस्तियां, एक सरकारी आवास कॉलोनी, कला नगर सहित कई आवासीय सोसाइटी शामिल हैं। 

2009 में बना था निर्वाचन क्षेत्र
बांद्रा रेलवे स्टेशन के पूर्वी हिस्से में स्थित बांद्रा पूर्व को 2009 में एक अलग निर्वाचन क्षेत्र के रूप में बनाया गया था। पहले इसे कांग्रेस के गढ़ खेरवाड़ी के नाम से जाना जाता था। शिवसेना के बाला सावंत ने 2009 में इस सीट से जीत हासिल की और 2014 में इसे बरकरार रखा। 2015 में उनकी मृत्यु के बाद सेना ने उनकी पत्नी तृप्ति सावंत को उपचुनाव में मैदान में उतारा। उन्होंने नारायण राणे को हराया। राणे तब कांग्रेस में थे। 2019 में सेना ने सावंत की जगह महादेश्वर को मैदान में उतारा था। वे जीशान सिद्दीकी से हार गए थे। इस सीट पर मराठी, दलित और मुस्लिम वोट निर्णायक हैं।

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