तमिलनाडु की दिवंगत मुख्यमंत्री जे जयललिता की मौत को दो साल हो चुके हैं लेकिन उनके बैंट अकाउंट अभी भी चल रहे हैं।
अभी दो दिन पहले ही आयकर विभाग ने सभी को ये बताकर आश्चर्य चकित कर दिया कि अपनी मौत से दस साल पहले तक तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता जिस घर में रहती थीं उसे आयकर विभाग ने 16.74 करोड़ रुपये बकाया होने की वजह से अटैच किया हुआ था।
यह तथ्य तब सामने आए जब मद्रास हाईकोर्ट के सामने आयकर विभाग ने कहा कि वेद निलायम, जयललिता का पॉश गार्डन रेसीडेंस साल 2007 से ही विभाग ने अटैच किया हुआ था।
आयकर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "हमारे पास जानकारी है कि व्यवसायिक और आवासीय संपत्ति, जिसमें कोडानाड की संपत्ति भी शामिल है, से हर महीने किराए का पैसा आ रहा है।"
उन्होंने कहा कि बकाया राशि 5 दिसंबर, 2016 से उनकी मौत के बाद से लगातार बढ़ती जा रही है, क्योंकि किसी ने भी अभी तक इसे चुकाने की जिम्मेदारी नहीं ली है।
अधिकारी ने कहा, "आयकर विभाग एक्ट के अनुसार हमनें जयललिता की चार संपत्ति अटैच करने के बाद, सब-रजिस्ट्रार से कहा है कि इनमें से किसी में भी डील न करें। और जब तक उनका आयकर का बकाया पूरा न दिया जाए न तो संपत्ति को बेचा जाए और न दी पट्टे पर दिया जाए।"
वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "हमनें सब-रडिस्ट्रार्स को सूचित करने के अलावा कई बार पूर्व मुख्यमंत्री को रिमाइंडर भेजे थे कि वह कर का बकाया दें। लेकिन उन्होंने कोई कदम नहीं उठाया न तो बकाया राशि दी और न ही अपनी संपत्ति को अटैच करने के लिए जारी किया। उनकी फाइल में कागजों के बंडल हैं, जिनमें समन, रिमाइंडर आदि की जानकारियां हैं। समन गए और आए पर कर की राशि का भुगतान करने के लिए कोई एक्शन नहीं लिया गया।"
विभाग के स्थायी वरिष्ठ परामर्शदाता एपी श्रीनिवास ने बताया कि वेद नियालम के अलावा तीन और संपत्ति- दो चेन्नई में और एक हैदराबाद को भी विभाग ने अटैच किया हुआ था। यह प्रस्तुतियां जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान की गईं। याचिका राज्य सरकार को वेद निलायम को स्मारक के तौर पर बदलने से रोकने के लिए दाखिल की गई है। जिसे सामाजिक कार्यकर्ता केआर रामास्वामी ने दाखिल किया है।