भारतीय रेल की तरफ से बृहस्पतिवार को कहा गया कि पिछले तीन साल में यहां अतिक्रमण और अप्रिय हादसों में 29-30 हजार लोगों की मौत हुई है। रेलवे के पिछले वित्त वर्ष में शून्य मौत के दावे पर नीति आयोग द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद रेल मंत्रालय की तरफ से बृहस्पतिवार को इसपर जानकारी दी गई।
नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत द्वारा रेलवे के दावों को संज्ञान में लेने और आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने के बाद रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वी के यादव की तरफ से यह स्पष्टीकरण आया। कांत ने कहा था कि मुंबई उपनगरीय खंड पर ही प्रतिवर्ष हजारों मौत होती है।
नीति आयोग के सीईओ ने एक पत्र में यादव को कहा, 'मैं आपका ध्यान इस तथ्य की तरफ आकृष्ट करना चाहूंगा कि इन मौतों में से बहुत सी ट्रेन से या प्लेटफॉर्म से पटरी पर गिरने से होती हैं। इसलिए उन्हें राष्ट्रीय रेल संरक्षण कोष के दायरे से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए। आदर्श रूप से उन्हें आधिकारिक रूप से दर्ज करना चाहिए।'
यादव ने बृहस्पतिपार को एक प्रेस वार्ता में कहा कि रेलवे सभी मौतों का हिसाब रखता है जो उसके परिसर में होती हैं। इन्हें तीन अलग शीर्षकों- परिणामी दुर्घटनाएं, अतिक्रमण और अप्रिय घटनाओं में दर्ज किया जाता है। उन्होंने कहा, 'यह सच है कि 2019-20 में परिणामी दुर्घटनाएं वास्तव में शून्य रहीं और इस साल भी।'
रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ने आगे कहा, 'बीते तीन वर्षों में 29 से 30 हजार लोगों की मौत या तो अतिक्रमण या अप्रिय घटनाओं के कारण हुई।' उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा हम नीति आयोग को देंगे।’