फिल्म पद्मावती के विरोध को सर्वोच्च न्यायालय से झटका लगने के बाद मामला भगवा परिवार को खटक गया है। मामले की सियासी गहराई को देखते हुए भगवा परिवार ने इसका विरोध तेज कर दिया है।
न्यायालय के हाथ खिंचने के बाद भगवा परिवार के संगठन विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल ने न सिर्फ विरोध जताया है बल्कि राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से फिल्म का प्रदर्शन रोकने की मांग की है। बताया जा रहा है कि गुजरात विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भगवा परिवार की ओर से पद्मावती का विरोध तेज होगा। अब तक चंद लोग ही इस फिल्म का विरोध कर रहे थे। मगर अब संघ के संगठनों की आवाज मुखर होगी।
पद्मावती के जरिए राजपूत मतों पर है नजर
गुजरात चुनाव के ऐन मौके पर शुरू हुए पद्मावती के विवाद को भगवा परिवार यूं ही हाथ से जाने देने के मूड में नहीं है। गुजरात चुनाव में राजपूत बिरादरी के मतों की संख्या करीब 5 प्रतिशत बताई जाती है। परंपरागत रूप से गुजरात के राजपूत कांग्रेस के समर्थक माने जाते हैं।
भाजपा के खिलाफ पटेलों की नाराजगी को देखते हुए भगवा परिवार उससे होने वाले खामियाजे की भरपाई में जुट गया है। इसलिए सीधे भाजपा के बजाय भगवा परिवार ने पद्मावती के विरोध पर रूख तेज कर दिया है। बताया जा रहा है कि संघ की ओर से आने वाले दिनों में केंद्र सरकार से भी आग्रह होगा कि वह पद्मावती फिल्म के मामले में हस्तक्षेप करे। इससे पहले केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी कह चुकी हैं कि फिल्म सेंसर बोर्ड पद्मावती के मामले में अपना काम निष्पक्ष करेगा।
लेकिन सरकार पर संघ की ओर से दबाव बढ़ने की उम्मीद है। राजपूतों का मामला केवल गुजरात चुनाव के लिए ही अहम नहीं है। बल्कि पद्मावती का भरपूर विरोध कर संघ परिवार की रणनीति राजस्थान के राजपूतों को भी साधने की है।
यहां भी वसुंधरा राजे की कम हो रही चमक भाजपा और संघ के लिए चिंता का सबब बनी हुई हैं। अगले वर्ष यहां राज्य विधानसभा के चुनाव होते हैं। यही वजह है कि संघ ने अपने संगठनों को गुजरात और राजस्थान में विशेष रूप से पद्मावती के विरोध के निर्देश दिए हैं।