भारतीय नौसेना के पास करीब पांच साल पहले शामिल हुआ एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रमादित्य अपने पहले और बड़े ओवरहॉल (सर्विस) के लिए जाने वाला है। यानि नौसेना के पास समुद्र में तीन महीने तक एक भी एयरक्राफ्ट नहीं होगा। नौसेना के अधिकारियों ने बताया कि 2018 में आईएनएस विक्रांत के आने की उम्मीद थी लेकिन अभी उसके समुद्री परीक्षणों में कुछ समय और लगेगा। ऐसे में आईएनएस विक्रमादित्य की सर्विस को भी नहीं टाला जा सकता। इसकी ओवरहॉलिंग मानसून ढलने के बाद ही शुरु कर दी जाएगी।
इससे पहले साल 2016 में इसका एक छोटा ओवरहॉल हुआ था। जिसमें कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने नौसेना के इस विशाल युद्धपोत की क्षमता साबित की थी। इस शिपयार्ड के पास ओवरहॉलिंग के काम के लिए 70 दिनों का समय था लेकिन इसने महज 42 दिनों में ही यह काम पूरा कर लिया। छह साल यह पहला मौका होगा जब तीन महीनों तक नौसेना बिना किसी एयरक्राफ्ट के रहेगी। इससे पहले साल 2012 में नौसेना का एकमात्र एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विराट सर्विस के लिए गया था।
बता दें आईएनएस विक्रमादित्य 45,000 टन का युद्पोत है। इसकी लंबाई 284 किलोमीटर और चौड़ाई 60 मीटर है। इस सर्विस के दौरान एयरक्राफ्ट कैरियर के सभी 22 डैक की भी रिफिटिंग होगी। इसमें करीब 1600 नौसैनिकों के रहने के कक्ष और उनके ठहरने की व्यवस्थाओं को भी एक नया रूप दिया जाएगा। इस कैरियर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 8,000 टन की क्षमता के साथ 13,000 किलोमीटर तक जा सकता है। वहीं सर्विस के बाद इसमें पैदा होने वाली 18 मेगावाट की बिजली क्षमता भी बढ़ जाएगी।