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केरल: NIA करेगी लव जिहाद मामले की जांच, सुप्रीम कोर्ट ने सौंपा जिम्मा

Thu, 17 Aug 2017 07:47 AM IST
amarujala.com- presented by: मनीष कुमार
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- फोटो : Indian Express
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केरल से विवादों में आया लव जिहाद मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी को सौंप दी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर एनआईए अब इस मामले की गंभीरता से जांच करेगी। बताया जा रहा है कि रिटायर्ड जज आरवी रवींद्रन की देखरेख में ये जांच होगी, क्योंकि घटना के पीछे चरमपंथी हाथ होने की बात कही जा रही है।
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पढ़ें: सु्प्रीम कोर्ट के इतिहास में पहली बार 'लव जेहाद' की सुनवाई, NIA से मांगे सबूत

इससे पहले कोर्ट ने केरल पुलिस को आदेश दिए थे कि वो इस केस से जुड़ी सभी जानकारी एनआईए को सौंप दे। इससे पहले कोर्ट ने पुलिस को मामले की सख्त जांच के लिए कहा था। बता दें कि ये मामला केरल का है, जिसमें हिंदू लड़की को बहला-फुसलाकर शादी करने का आरोप है।

केरल हाईकोर्ट इस शादी को रद्द कर चुका है, जहां इसे 'लव जेहाद' का मामला बताया था। वहीं, शादी रद्द किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे मुस्लिम पति का कहना है कि उसकी पत्नी(पूर्व) बालिग है और किसी से भी शादी करने के साथ ही किसी भी धर्म को मानने के लिए स्वतंत्र है।
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सुूप्रीम कोर्ट ने दिए सख्त आदेश

सुप्रीम कोर्ट
इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए को जांच करने का आदेश दिया है और कहा कि वो 10 दिनों के अंदर जरूरी सबूत पेश करे। सुप्रीम कोर्ट ने लड़की के पिता को भी आदेश दिया है कि वो 10 दिनों के भीतर ऐसे कागजात प्रस्तुत करे, जिसमें लड़की को बहला-फुसलाकर शादी कराई गई है।

इस मामले को केरल हाईकोर्ट ने लव जिहाद का मामला बताते हुए शादी को रद्द घोषित कर दिया था। और महिला को उसके पिता के पास भेज दिया था। सुप्रीम कोर्ट में युवक ने अपने वकील कपिल सिब्बल और इंदिरा जयसिंह के जरिए अपील की कि उसकी पत्नी(पूर्व) बालिग है और किसी भी धर्म को मानने के साथ ही किसी भी व्यक्ति से शादी करने को स्वतंत्र है।

इसके बाद दोनों वकीलों ने दलील दी कि केरल हाई कोर्ट ने शादी रद्द करने का आदेश दिया और पति को पत्नी से मुलाकात करने तक पर रोक लगा दी है। इस आदेश पर सुप्रीम कोर्ट जांच कराए। उन्होंने लड़की के बयान दर्ज कराने की भी मांग की की।

दरअसल, हिंदू लड़की के तीन नाम सामने आए हैं। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले को संदिग्ध माना है और एनआईए से सबूत जमा करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि कोई युवती 24 की उम्र में ऐसे काम नहीं कर सकती, इसलिए सच्चाई सामने आनी चाहिए। इस मामले की अगली सुनवाई 14 अगस्त को होगी।
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