उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को एक और एतिहासिक फैसला सुनाया जिसमें केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं के प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध को पूरी तरह से निरस्त कर दिया है। अदालत ने मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी पाबंदी को हटा दिया और कहा कि पूजा करने का अधिकार भगवान के सभी भक्तों को है, लिंग के आधार पर इसमें कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता है।
यही नहीं मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि महिलाएं पुरुषों से बिल्कुल भी कम नहीं हैं। एक तरफ तो हमारे देश में महिलाओं को देवी के रूप में पूजा जाता है, वहीं दूसरी ओर उनके मंदिर में प्रवेश पर ही प्रतिबंध लगाया गया है। फैसला पढ़ते हुए मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने कहा कि भगवान के साथ संबंध जैविक या शारीरिक कारकों द्वारा परिभाषित नहीं किया जा सकता है।
सबरीमाला देश का पहला या आखिरी मंदिर नहीं है जहां महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया हो। देश में कई ऐसे मंदिर, मस्जिद और दरगाह मौजूद हैं जहां महिलाओं का प्रवेश वर्जित है। कई ऐसे मंदिर हैं जहां देवियों को पूजा जा रहा है लेकिन वहां देवी स्वरूपा महिलाओं का प्रवेश पूरी तरह से वर्जित है।
आइए जानते हैं ऐसे ही मंदिरों और दरगाहों के बारे में:
कामाख्या मंदिर: माहवारी के उत्सव में महिलाओं का प्रवेश वर्जित
भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम की राजधानी गुवाहाटी के पश्चिम में नीलांजन की पहाड़ियों पर बसा है विख्यात कामाख्या मंदिर। कामाख्या देवी के इस मंदिर के गर्भगृह में जो आराध्य मूर्ति है, वह किसी बलशाली देव की नहीं, बल्कि स्त्री की योनि की है। इस मंदिर में हर साल चार दिनों का मेला लगता है-अंबुबाची मेला। मान्यता है कि इस दौरान देवी कामाख्या रजस्वला होती हैं। चार दिनों का यह मेला उनके मासिक धर्म का उत्सव मनाने के लिए किया जाता है।
जब देवी के राजस्वला (माहवारी) को एक उत्सव के रूप में मनाया जाता हो यह सुनकर ऐसा लगता है कि इस देश में स्त्री होना कितने गौरव की बात है। लेकिन सच्चाई ठीक उलट है। चार दिनों तक स्त्री के शरीर से हर महीने निकलने वाले रक्त का उत्सव मनाने वाले इस विश्व विख्यात मंदिर का एक सच और भी है- यहां पीरियड्स के दौरान महिलाओं को प्रवेश करने की इजाजत नहीं है। जी हां, जिस मंदिर में योनि की मूर्ति है, जहां देवी के रजस्वला होने पर मेला लगता है, वहां इस दौरान स्त्री का प्रवेश प्रतिबंधित है।
शनि शिंगणापुर में महिलाओं का प्रवेश था वर्जित
महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में एक छोटा-सा गांव है शनि शिंगणापुर, इस मंदिर में भी महिलाओं का प्रवेश वर्जित है। इस अनूठे गांव के बारे में अनूठी कहानियां प्रचलित हैं। कहते हैं कि इस गांव में बीते 400 साल में कभी चोरी, दंगे, हत्या या बलात्कार की एक भी घटना नहीं हुई। यहां किसी घर के दरवाजे पर आपको ताला नहीं मिलेगा।
शनि शिंगणापुर में रहने वाले सारे लोग अपने हाल से खुश रहते हैं। बस कुछ पुराने पीपल के पेड़ हैं, जिन्हें लोग हर शनिवार व्रत के दौरान श्रद्धा से छूने का रिवाज है। क्योंकि इस रहस्यमय गांव की रक्षा में एक चमत्कारिक काला पत्थर कर रहा है। ये काला पत्थर कोई और नहीं शनि देव हैं।
यूपीः हमीरपुर के इस प्राचीन मंदिर में आज भी वर्जित है महिलाओं और कन्याओं का प्रवेश
सैकड़ों वर्षों से इस मंदिर में महिलाओं का प्रवेश वर्जित रहा है। महिलाओं ने भी हमेशा ना-नुकुर किए बगैर इस अलिखित नियम का पालन किया और इस पर कभी सवाल नहीं किया। और उस दिन ऐसा कुछ हुआ कि अचानक यह मुद्दा टीवी चैनलों की बहसों और अखबारों के लेखों में सबसे बड़ा सवाल बन गया।