देश भर में पड़ रही भयंकर गर्मी अप्रैल में कई रिकॉर्ड तोड़ने वाली है। मार्च में होने वाले प्री मानसून के कमजोर होने के चलते इस साल अप्रैल में गर्मी का असर ज्यादा है। मौसम विभाग के मुताबिक अगर पिछले सालों के आकंड़ों को देखा जाए तो इस साल मार्च में होने वाला प्री-मानसून कमजोर रहा है।
इस साल मार्च में होने वाली बारिश में 8 फीसदी की कमी रही है। महाराष्ट्र एक ऐसा राज्य है, जहां सबसे कम बारिश हुई है। साथ ही दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और पूर्वी-पश्चिम यूपी का हाल भी कुछ ऐसा ही रहा है। एक्सपर्ट्स की माने तो प्री-मानसून से गर्मी के कहर से थोड़ी राहत मिल जाती है।
हालांकि जिस तरीके से मौसम में बदलाव हो रहा है, उसके मुताबिक अप्रैल में मानसून में 11 फीसदी तक की कमी आ सकती है। इसका सीधा असर, उत्तर भारत के कई राज्यों में पड़ने वाला है। इससे पहले साल 2014 से 2016 तक मार्च में बेहतर बारिश हुई।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक आईएमडी के अधिकारियों का कहना है कि प्री-मानसून के हालात हर साल एक जैसे हो। ऐसा जरूरी नहीं है। लेकिन इस साल का बदलाव एक बड़ी चिंता सामने लेकर आया है। ऐसे में उत्तर भारत में गर्मी की मार और बढ़ने की आशंका है।